रामपुर विकास प्राधिकरण की तरफ से रामपुर की की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया है. जिसके बाद इस मुद्दे पर प्रतिक्रियाओं का भी दौर तेज हो गया है, जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष हजरत मौलाना सैयद अरशद मदनी ने भी इस मामले को लेकर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने इस कार्रवाई को भी गलत करार दिया है.

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मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से संबंधित आदेश को जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष हजरत मौलाना सैयद अरशद मदनी ने गलत करार दिया है. मौलाना सैयद अरशद मदनी ने कहा कि, "...जो किया जा रहा है वह गलत है. अनियमितताएं होने पर भी, विध्वंस से पहले मामले का फैसला न्यायालय द्वारा किया जाना चाहिए. यदि कोई कानूनी उल्लंघन हुआ है, तो सरकार कानून के तहत जुर्माना लगा सकती है. ध्वस्तीकरण पहला या एकमात्र विकल्प नहीं होना चाहिए..."

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जौहर यूनिवर्सिटी को गिराने की क्यों आई नौबत?

दरअसल, रामपुर विकास प्राधिकरण ने बिना स्वीकृत नक्शे के निर्माण को अवैध माना है. विस्तृत सुनवाई के बाद ध्वस्तीकरण के संबंध में आदेश जारी किया गया है. आपको बता दें कि, जौहर यूनिवर्सिटी का मामला इसलिए भी चर्चाओं में हैं क्योंकि समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान इस यूनिवर्सिटी के कुलपति हैं, जो इन दिनों जेल में बंद हैं.

यूनिवर्सिटी के 40 में से 38 भवन बिना नक्शे के- डीएम

इस संबंध में रामपुर के डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने कहा, "जौहर यूनिवर्सिटी की इमारत बिना अनुमति के बनाई गई थी. सारी कार्रवाई संपन्न होने के बाद पता चला कि जौहर यूनिवर्सिटी में 40 भवनों का निर्माण किया गया है जिसमें से मात्र दो का नक्शा स्वीकृत है, बाकी 38 भवन बिना नक्शा पास कराए ही बनाए गए हैं. जिन्हें अवैध निर्माण माना गया और ध्वस्तीकरण का आदेश पारित कर दिया गया." बता दें कि रामपुर यूनिवर्सिटी पहले भी विवादों में रहा है. इसकी स्थापना साल 2006 में हुई थी.

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