उत्तर प्रदेश स्थित महराजगंज में ₹208 करोड़ से अधिक लागत की विभिन्न जन-कल्याणकारी परियोजनाओं के लोकार्पण/शिलान्यास कार्यक्रम में सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत और नेपाल, दोनों मित्र देश के रूप में एक साझी विरासत का प्रतिनिधित्व करते हैं.

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सीएम ने कहा कि भारत और नेपाल, दोनों  मित्र देश के रूप में एक साझी विरासत का प्रतिनिधित्व करते हैं. दोनों देशों के बीच रोटी बेटी का संबंध है. नेपाल के लोग भारत के अंदर और भारत के लोग नेपाल के अंदर बिना किसी बाधा के आते जाते हैं. और बौद्ध तीर्थ स्थल होने के नाते देश और दुनिया की निगाह भी इस पूरे क्षेत्र में बनी रहती है.

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मुख्यमंत्री ने कहा कि उन स्थितियों में बौद्ध परिपथ का हिस्सा होने के कारण, दोनों देशों के सीमावर्ती क्षेत्र का हिस्सा होने के नाते, सुरक्षा के लिहाज से भी और भारत, महाराजगंज, नौतनवा, फरेंदा के नागरिकों को कहीं भी विकास के पैमाने पर अपने आपको, कहीं भी उनको पिछड़ा महसूस होने की नौबत न आने पाए और नेपाल का कोई व्यक्ति अगर अपने किसी काम के लिए इस क्षेत्र में आए तो उसको भी कोई परेशानी न हो, उसके लिए विकास अत्यंत आवश्यक है.

नेपाल ने लिपुलेख पर क्या कहा था?

इसके साथ ही सीएम ने कहा कि डबल इंजन की भाजपा सरकार गरीबों की पीड़ा सुन रही है और उसका समाधान भी निकाल रही है. हमें विपक्ष की नकारात्मक राजनीति और नैरेटिव का शिकार नहीं होना है.

सीएम योगी का बयान ऐसे वक्त में आया है जब करीब एक हफ्ते पहले नेपाल ने कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर 3 मई को सीमा संबंधी दावों का जिक्र किया था. नेपाल के बयान पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा था कि कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए  लिपुलेख पास वर्ष 1954 से रास्ता है.