मौलाना अरशद मदनी के बयान पर विवाद खड़ा हो गया है. मौलाना अरशद मदनी ने अपने बयान में कहा था कि नफरत के सौदागर और हिंदू राष्ट्र का सपना देखने वालों को नेपाल से सबक लेना चाहिए. एक दिन ऐसा भी अवश्य आएगा जब जालिमों के गले में जंजीरें होंगी और देश एक बार फिर प्यार, मोहब्बत और इंसाफ के साए (रास्ते) में तरक्की करेगा. अब उनके बयान पर संतों की प्रतिक्रिया आई है.

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अरशद मदनी के बयान पर संतों का कहना है कि अरशद मदनी ने बिल्कुल सही कहा, वह इस अर्थ में सही हैं कि जालिमों के गले में जंजीर होगी. ऐसा है जो सनातन परंपरा के लोग हैं जो हिंदू रीति रिवाज के या हिंदू धर्म से ताल्लुक रखने वाले लोग हैं, वह जालिम तो नहीं है. जालिम कोई और हैं और उन्होंने बिल्कुल सही कहा कि जालिमों के गले में जंजीर होगी और हिंदू राष्ट्र ऐसा नहीं होना चाहिए.

अरशद मदनी के बयान पर संतों का क्या कहना है?

संतों की ओर से कहा गया है कि यह जो हमारा भारत देश है यह हिंदू राष्ट्र है. इसमें हिंदू राष्ट्र होने जैसी कोई बात नहीं है. इस भ्रम में कोई ना रहे कि यह हिंदू राष्ट्र नहीं है यह हिंदू राष्ट्र ही है और हिंदू राष्ट्र रहेगा. 

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उन्होंने आगे कहा कि जब इसका विभाजन हुआ तो हिंदुस्तान और पाकिस्तान दो देश बने, तो यह हिंदुस्तान है तो हिंदू राष्ट्र है. हिंदुस्तान का अर्थ हिंदुओं का निवास है तो हिंदू राष्ट्र है. इसमें किसी के बोलने या ना बोलने की क्या बात है. 

नेपाल को लेकर क्या बोले संत?

नेपाल की बात करें तो कि नेपाल की तो वहां तो अभी प्रजातंत्र है. आगे कहा कि पाकिस्तान में हिंदुओं की संख्या 24 पर्सेंट थी, वह 2% रह गई. क्योंकि वह पाकिस्तान है. मदनी से मैं यह कहना चाहता हूं कि अपने आचार-विचार सही रखें. ऐसा कुछ ना हो कि मदनी भी मैं यह कहता हूं कि उनके भी पूर्वज हिंदू ही रहे हैं. अब वह हिंदुओं के बारे में ही ऐसा बोल रहे हैं.