उत्तर प्रदेश के नोएडा वेस्ट की हाईराइज सोसायटी में लिफ्ट सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठाते रहते हैं. लेकिन फिर भी आज तक लिफ्ट अटकने के मामलों पर कोई ठोस और मजबूत कदम नहीं उठाए गए हैं. मंगलवार (28 अप्रैल) को एक बार फिर ऐसा ही मामला सामने आए जिसे निवासियों की चिंता बढ़ा दी है.

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ग्रेटर नोएडा वेस्ट की महागुण माइवुड्स सोसाइटी में इकलिफ्ट अचानक बीच फ्लोर पर अटक गई जिसमें बुजुर्ग महिला समेत तीन लोग करीब 10 मिनट तक फंसे रहे. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही की आपात स्थिति में इस्तेमाल होने वाले अलार्म बटन ने भी काम नहीं किया.

लिफ्ट में न लाईट न पंखा

घटना के दौरान लिफ्ट में न लाइट थी ना पंखा चल रहा था और घुटन भरे माहौल में तीन लोगों की सांस अटक गई बुजुर्ग महिला की तबीयत बिगड़ने लगी और घबराहट इतनी बढ़ गई कि वह लिफ्ट के भीतर ही बैठ गई. लोगों की चीख पुकार सुनकर आसपास मौजूद निवासियों ने किसी तरह लिफ्ट का गेट खोलकर उन्हें बाहर निकाला.

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11वें फ्लोर के पास रुकी लिफ्ट  

बताया जा रहा है कि मंगलवार दोपहर टावर 11 की लिफ्ट से तीन लोग नीचे जा रहे थे. इनमें सोसायटी निवासी तुषार कपूर एक बुजुर्ग महिला मेड और एक अन्य व्यक्ति शामिल था तभी अचानक बिजली चली गई और लिफ्ट 11वीं फ्लोर के पास रुक गई. बिजली जाने के साथ ही लिफ्ट के अंदर अंधेरा छा गया पंखा बंद हो गया. इंटरकॉम ने काम करना बंद कर दिया और सबसे गंभीर बात आपातकालीन बटन दबाने के बावजूद कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली.

अलार्म भी नहीं बजा

लिफ्ट में फंसे तुषार कपूर ने बताया की शुरुआत में लगा कि कुछ ही सेकंड में लिफ्ट दोबारा चल पड़ेगी लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया घबराहट बढ़ती चली गई. गर्मी और बंद माहौल के कारण सांस लेने में दिक्कत होने लगे इसी दौरान बुजुर्ग महिला की हालत खराब होने लगी घुटन के कारण वह अपने आप को कमजोर महसूस करने लगी और लिफ्ट के फर्श पर बैठ गई. कई बार अलार्म बटन बजाने और दरवाजा पीट कर मदद मांगने की कोशिश की गई लेकिन कोई तुरंत मदद के लिए नहीं पहुंचा.

लिफ्ट की सुरक्षा पर उठ रहे सवाल

इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल लिफ्ट में लगे सुरक्षा सिस्टम पर उठ रहा है निवासियों का आरोप है कि अलार्म बटन ने काम नहीं किया और ऑटोमेटिक रेस्क्यू डिवाइस भी सक्रिय नहीं हुआ. सामान्य स्थिति में बिजली जाने पर एआरडी सिस्टम लिफ्ट को नजदीकी फ्लोर तक पहुंचने में मदद करता है और लिफ्ट का दरवाजा खोल देता है. लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ इससे साफ है कि या तो सिस्टम फेल था या उसका रखरखाव ठीक से नहीं किया गया.घटना के दौरान 11 फ्लोर से गुजर रहे कुछ निवासियों ने मदद के लिए आवाज सुनी इसके बाद उन्होंने दूसरे तरफ से सहयोग लेकर लिफ्ट के दरवाजे को खींचकर खोला और फसल लोगों को बाहर निकाला.

मेंटेनेंस को लेकर खड़े हुए सवाल सुरक्षा के दावो की खुली पोल

इस घटना के बात सोसायटी के निवासियों का कहना है कि बिल्डर और सुरक्षा प्रबंध रखरखाव के बड़े-बड़े दावे करती है लेकिन हकीकत कुछ और ही है. करोड़ों रुपए के फ्लैट बेचने वाली सोसायटी में अगर लिफ्ट का अलार्म बटन तक नहीं काम करता तो यह गंभीर लापरवाही है. साथ ही हर महीने मोटा मेंटेनेंस शुल्क निवासियों से वसूला जाता है लेकिन सुरक्षा के नाम पर सिर्फ हवा हवाई दावे निवासियों को मिलते हैं. वहीं दूसरी और समिति के लोगों ने लिफ्ट की सुरक्षा ऑडिट करने की मांग की है उनका कहना है कि सभी टावरों की लिस्ट की तकनीकी जांच हो और दोषी एजेंसियों पर कार्रवाई की जाए. ताकि इस तरह के हादसों को रोका जा सके.

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