उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में ऑनलाइन एप से मंगवाए करीब 15 हजार रूपये के जूते एक माह में ही फट गए. कंपनी की तरफ से उन्हें डेढ़ साल की गारंटी दी गई थी. शिकायत करने पर जूता पहना और गंदा होने की वजह से कंपनी ने उन्हें वापस लेने से इनकार कर दिया. 

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जिला उपभोक्ता आयोग ने 30 दिन में जूता निर्माता कंपनी को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार आचरण का दोषी ठहराते हुए ग्राहक को नया जूता देने या पूरे पैसे लौटाने का आदेश दिया.

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क्या है पूरा मामला ?

नोएडा निवासी आशीष ने 26 फरवरी 2024 को विज्ञापनों से प्रभावित होकर ऑनलाइन 15 हजार रुपये में रेड चीफ के जूते ऑर्डर किए थे. 4 मार्च को जूतों की डिलीवरी हुई, लेकिन उपभोक्ता के अनुसार उनकी गुणवत्ता खराब थी. एक महीने के भीतर ही जूते फट गए. कस्टमर केयर से बात करने के बाद भी कंपनी ने जूते वापस नहीं लिए. आशीष ने कंपनी को ईमेल भेजकर पैसे वापस मांगे. कंपनी ने पैसे देने से इनकार कर दिया. पीड़ित ने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई. आयोग ने नोटिस जारी करते हुए कंपनी को कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए. 

कंपनी के दावों को आयोग ने नकारा 

कंपनी ने कोर्ट में स्वीकार किया कि 25 फरवरी को ऑनलाइन ऑर्डर दिया गया था, लेकिन किसी भी तरह के विनिर्माण दोष से इनकार किया. कंपनी का तर्क था कि वह उच्च गुणवत्ता वाले जूते बनाने के लिए जानी जाती है और ग्राहक ने जूते इस्तेमाल करके रिटर्न नीति का उल्लंघन किया है. कंपनी ने आरोप लगाया कि ग्राहक ने शुरुआत में खराब गुणवत्ता की कोई तस्वीर नहीं भेजी, जबकि उपभोक्ता ने दावा किया है कि कंपनी ने जो भी मांगा था वह उन्हें भेजा गया. 

आयोग ने जूता बनाने वाली कंपनी को 30 दिनों के भीतर 15 हजार रुपये की कीमत का नया जूता दे या पूरी राशि रिफंड करे. इसके अलावा, कंपनी को मानसिक उत्पीड़न के मद में 5,000 रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में 2,000 रुपये का भुगतान करे.

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