गोरखपर में 'माह-ए-रमजान व ईद में कैसे करें इबादत' विषय पर रविवार (8 मार्च) को मदरसा रजा-ए-मुस्तफा तुर्कमानपुर में महिलाओं का सेमिनार हुआ. इस दौरान कुरआन-ए-पाक की तिलावत खुशी नूर ने की. मदरसे की छात्राओं सना फातिमा, उमरा, फाइजा ने नात व मनकबत पेश की.
वहीं अल कलम एसोसिएशन की ओर से 'किताबें बुला रही हैं' नाम से दीनी किताबों का स्टॉल भी लगाया गया, जिसके प्रति महिलाओं में काफी उत्साह दिखा. मदरसे के प्रधानाचार्य कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने कहा कि रमजान मुहब्बत का पैगाम देता है.
मदरसे के प्रिंसिपल ने क्या बताया?
कारी मुहम्मद अनस ने बताया कि अल्लाह ने इस पाक महीने में हर नेक बंदे को रहमत व बरकत से नवाजने का वादा किया है. रमजान में रोजेदार के दिल में अल्लाह प्यार का सैलाब भरने के साथ दूसरों के लिए हमदर्दी भी देता है. रोजा रखने से दिल को सुकून और रूह को ताजगी मिलती है.
उन्होंने आगे कहा कि बुरी आदतों से इंसान दूर होता है और नेक राह पर चलने को प्रेरित होता है. खुद को अल्लाह की राह में समर्पित कर देने का प्रतीक पाक महीना रमजान न सिर्फ रहमतों और बरकतों की बारिश लाता है बल्कि समूची मानव जाति को प्रेम, भाईचारे और इंसानियत का संदेश भी देता है.
अपने गुनाहों की रो-रो कर माफी मांगें: खदीजा फातिमा
संचालन करते हुए खदीजा फातिमा ने कहा कि रमजान का दूसरा अशरा खत्म होने वाला है. हमें अल्लाह से अपने गुनाहों की रो-रो कर माफी मांगनी चाहिए. रमजान का तीसरा अशरा जहन्नम की आग से अल्लाह की पनाह मांगने का है. तीसरे अशरे में शबे कद्र जैसी अजीम नेमत है, जिसमें इबादत करने पर बहुत ज्यादा सवाब मिलता है.
उन्होंने आगे बताया कि रमजान के आखिरी दस दिन का एतिकाफ करना पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सुन्नत है. अंत में दुरूद ओ सलाम पढ़कर पूरी दुनिया में शांति की दुआ मांगी गई.
संगोष्ठी में शिफा खातून, शालिबा, मुबस्सिरा, आस्मा खातून, नूरजहां, खुशी, फिजा खातून, सानिया, अदीबा, अस्गरी खातून, शाजिया, अख्तरुन निसा, शबाना खातून, गुलफिशा सहित तमाम महिलाओं ने हिस्सा लिया.
रोजेदारों के रूह व जिस्म की हो रही ट्रेनिंग
माह-ए-रमजान में रोजेदारों के रूह व जिस्म की ट्रेनिंग जारी है. रमजान का दूसरा अशरा खत्म होने वाला है. रोजेदार अल्लाह की रजा के लिए रोजा रखकर, नमाज पढ़कर व मालिके निसाब जकात व फित्रा अदा कर अपने व मुल्क के लिए दुआ मांग रहे हैं. रविवार को 18वां रोजा मुकम्मल हो गया. रोजेदारों ने भरपूर इबादत की.
माह-ए-रमजान में हर तरफ रहमत व नूर की बारिश हो रही है. तीसरा अशरा जहन्नम से आजादी का चंद दिनों के फासले पर है. रमजान के अंतिम दस दिन की पांच रातों यानी 21, 23, 25, 27 व 29 में से एक शबे कद्र की रात है, जिसमें इबादत करने पर बेशुमार सवाब मिलता है.
रमजान के दस दिन शहर की तमाम मस्जिदों में एतिकाफ भी होगा. मस्जिदें नमाजियों से गुलजार है. रविवार को नसीराबाद स्थित हैप्पी मैरेज हाउस में सामूहिक रोजा इफ्तार का आयोजन हुआ.
उलमा किराम ने दिए सवालों के जवाब
1. सवाल : क्या बेवा (विधवा) औरत ईद पर नए कपड़े पहन सकती है? जवाब : इद्दत के दिन गुजारने के बाद ईद पर नए कपड़े भी पहन सकती हैं और हर तरह की जायज खुशी में भी शरीक हो सकती हैं. इसमें कोई हर्ज नहीं है.
2. सवाल : रोजे की हालत में शुगर टेस्ट करा सकते हैं? जवाब : जी, करा सकते हैं.
3. सवाल : रोजे की हालत में कॉटन इयर बड्स से कान साफ कर सकते हैं? जवाब : जी कर सकते हैं। इसमें कोई हर्ज नहीं.
4. सवाल : इमामे तरावीह को देने के लिए लिए गए चंदे को मस्जिद ही के किसी और काम में इस्तेमाल कर सकते हैं? जवाब : नहीं, चंदा जिस काम के लिए लिया गया है. उसी में इस्तेमाल करेंगे बगैर देने वालों की इजाजत के किसी दूसरे काम में इस्तेमाल करना जायज नहीं.
ये भी पढ़ें: UP Weather: यूपी के ज्यादातर जिलों 35 डिग्री के पार पहुंचेगा पारा, पढ़ें मौसम विभाग का ताजा अपडेट
