2014 में हुए आगजनी, हंगामा और बवाल में आरोपी केंद्री मंत्री एसपी सिंह बघेल के साथ 1 हजार से अधिक लोग आरोपी थे जिसमें बघेल सहित 60 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुए थी. एमपी-एमएलए कोर्ट ने सभी को दोषमुक्त कर दिया. न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने यह फैसला सुनाया. इस मामले में दूसरा पक्ष कोई  सबूत दाखिल नहीं कर पाया.

क्या था मामलाबता दें कि, 2014 के लोकसभा चुनाव में एसपी सिंह बघेल भारतीय जनता पार्टी से उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद से चुनाव लड़े थे. उन्हें शक था कि समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी अक्षय यादव द्वारा कई जगह वोटिंग में बूथ कैपचरिंग और बेईमानी हुई है. उस समय उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी. वोटिंग खत्म होने के बाद एसपी सिंह बघेल ज्ञापन देने के लिए देर शाम सुभाष चौराहे पर धरने पर बैठ गए. जब पुलिस ने बल प्रयोग कर उन्हें उठाने का प्रयास किया और माहौल बिगड़ गया.

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इसमें आगजनी और काफी बवाल हुआ था जिसे लेकर एसपी सिंह बघेल और अन्य लोगों के खिलाफ थाना दक्षिण में मुकदमा दर्ज हुआ और कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई. इस मामले में आज 26 अप्रैल को सुनवाई हुई और फैसला मंत्री एसपी सिंह बघेल के पक्ष में आया और सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया.

मुलायम सबकी सलाह लेते थे- बघेलएसपी सिंह बघेल ने कहा कि समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव आज भी धरतीपुत्र हैं लेकिन उनका बेटा ट्विटर पुत्र है. मुलायम सिंह यादव सलाह लेते थे. वे तब बेनी प्रसाद, जनेश्वर मिश्र, आजम खान, रेवती रमन सिंह, अवधेश प्रसाद जैसे वरिष्ठ लोगों से सलाह लिया करते थे. इनके सलाहकार कौन है मैं उनका नाम नहीं लेना चाह रहा लेकिन चार पांच लोग उनको घेरे हुए हैं और भगवान ऐसे ही उन्हें आगे भी घेरे रहें ताकि हमारा काम आसान हो जाए. 

शिवपाल का तेजपत्ते की तरह इस्तेमाल- बघेलबघेल ने कहा, राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से तरह मुलायम सिंह को इसतरह हटाया गया जैसे खिलजियों ने अपने बाप को हटाया, तुगलकों ने अपने बाप को हटाया, शिवपाल यादव का तेज पत्ते की तरह इस्तेमाल कर उसका जाएगा लिया और फिर वहीं का वही छोड़ दिया. उन्हें साइकिल के चुनाव चिन्ह से चुनाव लड़ना पड़ा जिसका अखिलेश यादव को फायदा हुआ और शिवपाल वहीं के वहीं रहे.

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