उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय राजनीति और नगर निगम प्रशासन दोनों को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है. बीजेपी की महिला पार्षद ऊषा शंखवार ने अपने वार्ड में विकास कार्य न होने और अधिकारियों की अनदेखी से परेशान होकर नगर निगम परिसर में ही मुंडन कराकर विरोध जताया. इस दौरान वह भावुक होकर रोने लगीं और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए.
मंगलवार को वार्ड संख्या 6 की पार्षद ऊषा शंखवार अपने समर्थकों और कुछ अन्य पार्षदों के साथ नगर निगम कार्यालय पहुंचीं. वहां उन्होंने एक नाई को बुलाया और सबके सामने अपना सिर मुंडवा लिया. यह दृश्य देखकर मौके पर मौजूद लोग भी हैरान रह गए. विरोध प्रदर्शन के दौरान कई पार्षदों ने उनका समर्थन किया और नगर निगम प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई.
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मुंडन कराते समय ऊषा शंखवार खुद को रोक नहीं पाईं और रोते हुए अपना दर्द बयान किया. उन्होंने कहा कि पिछले तीन सालों से उनके वार्ड में कोई बड़ा विकास कार्य नहीं हुआ है. क्षेत्र में सफाई व्यवस्था खराब है और लोगों को पीने के पानी की भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है.
उन्होंने कहा कि जब भी वह अपने वार्ड में जाती हैं तो लोग उन्हें ही जिम्मेदार ठहराते हैं. जनता उनकी आलोचना करती है और रोज़ समस्याओं को लेकर सवाल पूछती है. पार्षद का कहना था कि उन्होंने कई बार नगर निगम अधिकारियों से लिखित और मौखिक शिकायत की, लेकिन हर बार उनकी बात को नजरअंदाज कर दिया गया.
ऊषा शंखवार ने आरोप लगाया कि अधिकारी उन्हें यह कहकर टाल देते हैं कि उनके वार्ड में पहले ही 64 लाख रुपये के काम कराए जा चुके हैं. उनका कहना है कि अगर इतने काम हुए हैं तो फिर जनता आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान क्यों है.
'सत्ताधारी दल की पार्षद हूं, फिर भी सुनवाई नहीं'
महिला पार्षद ने साफ कहा कि वह बीजेपी की पार्षद हैं, इसके बावजूद अधिकारी उनकी बात नहीं सुन रहे हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वह इससे भी बड़ा कदम उठाने को मजबूर होंगी.
उनका कहना था कि जनता अब उनसे जवाब मांग रही है और लगातार नाराजगी जता रही है. ऐसे में उनके पास विरोध करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था. इसी वजह से उन्होंने मुंडन कराकर अपनी नाराजगी जताई.
नगर आयुक्त पहुंचे मौके पर, दिया कार्रवाई का भरोसा
घटना की जानकारी मिलते ही नगर आयुक्त प्रशांत नागर तुरंत नगर निगम परिसर पहुंचे. उन्होंने महिला पार्षद को समझाने की कोशिश की और उनकी समस्याओं को जल्द दूर करने का आश्वासन दिया.
नगर आयुक्त ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वार्ड संख्या 6 में विकास कार्य कराए गए हैं, लेकिन अगर अभी भी कुछ समस्याएं बाकी हैं तो उन्हें प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाएगा. उन्होंने बताया कि एक विशेष टीम को मौके पर भेज दिया गया है, जो क्षेत्र का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार करेगी.
उन्होंने कहा कि टीम की रिपोर्ट आने के बाद जो भी काम अधूरे हैं, उन्हें जल्द पूरा कराया जाएगा और इसकी निगरानी प्रशासनिक स्तर पर की जाएगी.
नगर निगम ने जारी किया प्रेस नोट
मामला बढ़ने के बाद नगर निगम प्रशासन की ओर से एक प्रेस नोट भी जारी किया गया. इसमें दावा किया गया कि वार्ड संख्या 6 में कई विकास कार्य पहले ही कराए जा चुके हैं.
प्रशासन के मुताबिक, क्षेत्र में पेयजल संकट दूर करने के लिए करीब 35 लाख रुपये खर्च किए गए हैं. वहीं सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के लिए 32 सफाई कर्मचारियों की तैनाती की गई है.
नगर निगम का यह भी कहना है कि वार्ड के लिए 97 लाख रुपये से अधिक के विकास कार्य स्वीकृत किए जा चुके हैं और जल्द ही उन पर काम शुरू कराया जाएगा.
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विरोध ने खड़े किए कई सवाल
बीजेपी की ही महिला पार्षद द्वारा अपनी सरकार और नगर निगम के खिलाफ इस तरह खुलकर विरोध करना अब चर्चा का विषय बन गया है. सवाल यह उठ रहे हैं कि जब सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधि ही खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं, तो आम जनता की समस्याओं का समाधान कैसे होगा.
फिलहाल महिला पार्षद के इस अनोखे विरोध ने नगर निगम प्रशासन को हरकत में ला दिया है. अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन अपने दावों को जमीन पर कितना उतार पाता है.
