देहरादून के रिस्पना पुल के पास स्थित पैनेसिया सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में बुधवार की सुबह अचानक लगी आग ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया. ICU में भर्ती मरीजों को बाहर निकालने की भागदौड़, एंबुलेंस की आवाजाहट और धुएं से भरे वार्ड यह मंजर उन लोगों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं था जो उस वक्त वहां मौजूद थे. 

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इस हादसे में कांवली गांव निवासी  55  वर्षीय वीरवती की जान चली गई, जो ICU में भर्ती थीं. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार उनकी मौत धुएं से दम घुटने के कारण हुई. बताया जा रहा है वीरवती डियबटीज़ की मरीज थी और गिर कर चोट लगने के कारण दो दिन पहले अस्पताल मे भर्ती हुई थी इस पूरी घटना मे 3 पुलिसकर्मियों समेत 12 लोग भी घायल हो गए. घायलों में एक नवजात और एक ढाई साल की मासूम भी शामिल है.

AC में शॉर्ट सर्किट से भड़की आग, धुएं से फैली दहशत

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सुबह के वक्त जब अस्पताल में दिन की शुरुआत हो रही थी, तभी कुछ लोगों की नजर खिड़की से निकलते घने धुएं पर पड़ी. पर्दा हटाया तो ICU के भीतर आग फैलती दिखी. चीफ फायर ऑफिसर अभिनव त्यागी के मुताबिक आग की शुरुआत संभवतः ICU में लगे एयर कंडीशनर में शॉर्ट सर्किट से हुई. देखते ही देखते धुआं पूरे वार्ड में भर गया और अफरा-तफरी मच गई.

उस वक्त ICU में पांच से छह मरीज भर्ती थे जिनमें एक महिला और चार पुरुष शामिल थे. पूरे अस्पताल में उस समय करीब 14 से 15 मरीज थे.

5 से 7 मिनट में पहुंची फायर टीम, आग को फैलने से रोका

सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम महज 5 से 7 मिनट के भीतर मौके पर पहुंच गई. CFO अभिनव त्यागी ने बताया कि समय रहते हस्तक्षेप के कारण आग को ICU वार्ड तक ही सीमित रखा जा सका और वह पूरे अस्पताल में नहीं फैली. अस्पताल में तीन एग्जिट रास्ते, फायर एक्सटिंग्विशर, स्मोक सेंसर और होज रील जैसे इंतजाम मौजूद थे. CFO के मुताबिक अस्पताल के स्टाफ को पहले से मॉक ड्रिल और ट्रेनिंग मिली हुई थी, जिसकी वजह से मरीजों को व्यवस्थित तरीके से बाहर निकाला जा सका.

14 मरीज दूसरे अस्पतालों में भेजे गए

आग की सूचना फैलते ही अस्पताल प्रशासन ने मरीजों को निकालने का काम शुरू कर दिया. एंबुलेंस और निजी वाहनों की मदद से सभी 14 मरीजों को कैलाश अस्पताल समेत अन्य अस्पतालों में शिफ्ट किया गया. इनमें से 8 मरीजों को कैलाश अस्पताल में भर्ती कराया गया.

CFO ने कहा कि जब फायर टीम ने मरीजों को बाहर निकाला, उस वक्त किसी में भी थर्ड डिग्री बर्न जैसी गंभीर स्थिति नहीं दिखी. उन्होंने कहा — "हमने सभी को जिंदा बाहर निकाला. आगे उनकी मेडिकल स्थिति क्या रही, यह डॉक्टर बेहतर बता सकते हैं." 

मौत की वजह पर अलग-अलग बयान 

हादसे के बाद मौके पर पहुंचे गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडे ने स्पष्ट किया कि किसी भी मरीज की मौत जलने से नहीं हुई है. हालांकि स्थानीय स्तर पर यह जानकारी सामने आई कि वीरवती की मौत धुएं से दम घुटने के कारण हुई. मौत की वजह को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि बाकी है और मेडिकल जांच जारी है.

इमरजेंसी सेवाएं सीज, जांच के आदेश 

घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने अस्पताल की इमरजेंसी सेवाओं को तत्काल प्रभाव से सीज कर दिया है. गढ़वाल कमिश्नर और आईजी गढ़वाल ने खुद मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया. आग लगने के असली कारणों की गहन जांच शुरू कर दी गई है.