यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में इजाफा करने की घोषणा की है. वित्त विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी दीपक कुमार ने गुरुवार (21 मई) को इसको लेकर आदेश जारी किया. सरकार ने महंगाई भत्ते में इजाफे का फैसला ऐसे समय में लिया है जब वैश्विक संकट की वजह से पेट्रोल-डीजल और दूध के दामों में बढ़ोतरी हुई है.
योगी सरकार के फैसले का लाभ राज्य के लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स को होगा. आदेश के मुताबिक, बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता 1 जनवरी 2026 से लागू होगा.
इस संदर्भ में जारी शासनादेश में कहा गया है कि 1 जनवरी 2026 से 30 अप्रैल 2026 तक की बकाया धनराशि सीधे संबंधित अधिकारी और कर्मचारियों के भविष्य निधि (जीपीएफ) खाते में जमा की जाएगी. सरकार ने स्पष्ट किया है कि अवशेष राशि जमा करने से पहले उस पर देय आयकर और सरचार्ज की कटौती की जाएगी. यह प्रक्रिया वित्त विभाग के 21 मार्च 2023 के शासनादेश में निर्धारित सीमा के तहत पूरी की जाएगी.
डीए हाइक का कैसे मिलेगा फायदा?
शासनादेश के अनुसार जीपीएफ खाते में जमा बकाया राशि 1 मई 2027 तक खाते में ही रहेगी और कर्मचारी इसे उससे पहले नहीं निकाल सकेंगे. हालांकि जिन मामलों में भविष्य निधि नियमों के तहत अंतिम प्रत्याहरण (फाइनल विदड्रॉल) की अनुमति होगी, वहां यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा.
सरकार ने यह भी कहा है कि जो अधिकारी या कर्मचारी भविष्य निधि खाते के सदस्य नहीं हैं, उनकी अवशेष धनराशि पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) में जमा कराई जाएगी या फिर नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (एनएससी) के रूप में दी जाएगी. यदि किसी राशि के बराबर एनएससी उपलब्ध नहीं हो सकेगा तो उस हिस्से का भुगतान नकद किया जाएगा.
शासनादेश के अनुसार शासनादेश में कहा गया है कि राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) से आच्छादित अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए अलग व्यवस्था की गई है. शासनादेश के अनुसार 1 जनवरी 2026 से 30 अप्रैल 2026 तक के महंगाई भत्ते के बकाये में से 10 प्रतिशत राशि कर्मचारियों के टियर-1 पेंशन खाते में जमा की जाएगी. इसके साथ ही राज्य सरकार या नियोक्ता द्वारा उस अवशेष राशि का 14 प्रतिशत अंशदान भी टियर-1 खाते में जमा कराया जाएगा.
