मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बाराबंकी दौरे के दौरान दिए गए बयान के बाद जिले की राजनीति गरमा गई है. रामनगर स्थित लोधेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी के छह बार के विधायक फरीद महफूज किदवई पर आरोप लगाया था कि उन्होंने क्षेत्र के विकास से जुड़े प्रस्ताव सरकार को नहीं भेजे.

Continues below advertisement

अब इस बयान पर विधायक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विस्तार से जवाब दिया है. उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री से मिलने के लिए चार बार समय मांगा, कई पत्र भी भेजे, लेकिन उन्हें कभी मिलने का अवसर नहीं मिला.

चार बार समय मांगा, कई पत्र भी भेजे

बाराबंकी में समाजवादी पार्टी कार्यालय पर आयोजित प्रेस वार्ता में फरीद महफूज किदवई ने कहा कि उन्होंने टेलीफोन और लिखित पत्रों के माध्यम से मुख्यमंत्री से कई बार मिलने का अनुरोध किया. उनके अनुसार, रामनगर क्षेत्र के विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर लगातार पत्राचार किया गया, जिसकी रजिस्ट्री और दस्तावेज उनके पास सुरक्षित हैं. विधायक ने कहा कि मुख्यमंत्री के मंच से लगाए गए आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत हैं.

Continues below advertisement

बुढ़वल चीनी मिल और सूरतगंज पुल का उठाया मुद्दा

सपा विधायक ने कहा कि क्षेत्र की पहचान रही बुढ़वल चीनी मिल पिछले 15-20 वर्षों से बंद पड़ी है. इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री को कई बार पत्र लिखे और विधानसभा में भी मुद्दा उठाया, लेकिन समाधान नहीं हुआ. उन्होंने सूरतगंज पुल के निर्माण को भी क्षेत्र की प्रमुख आवश्यकता बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में इन महत्वपूर्ण स्थानीय मुद्दों का उल्लेख नहीं किया.

'विधायक होने के बावजूद कार्यक्रमों में नहीं बुलाया जाता'

फरीद महफूज किदवई ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में आयोजित कई सरकारी कार्यक्रमों में उन्हें आमंत्रित तक नहीं किया जाता. उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं के तहत बीज वितरण जैसे कार्यक्रमों में भी जनप्रतिनिधि की अनदेखी की जाती है. उन्होंने यह भी कहा कि पारिजात वृक्ष समेत कई स्थानीय मुद्दों को उन्होंने विधानसभा में प्रमुखता से उठाया है.

आरोप-प्रत्यारोप से गरमाई रामनगर की राजनीति

विधायक ने कहा कि वह मुख्यमंत्री के पद की गरिमा का सम्मान करते हैं, लेकिन क्षेत्र के विकास को लेकर उनकी ओर से लगातार प्रयास किए गए हैं. उन्होंने कहा कि रामनगर की जनता ने उन्हें कई बार विधायक बनाया है और वे क्षेत्र के विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं. मुख्यमंत्री के आरोपों और विधायक के पलटवार के बाद बाराबंकी की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है. अब क्षेत्र के विकास और जनहित के मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए हैं.