राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने चढ़ावे की गणना व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है. जानकारी के अनुसार, पहले चरण में 23 कर्मचारियों को हटाया गया था. इसके बाद कार्यरत बचे 13 कर्मचारियों को भी सेवामुक्त कर दिया गया. इसके साथ ही चढ़ावा गणना से जुड़े पुराने सभी कर्मचारियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो गई है.

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सूत्रों के मुताबिक, वाराणसी की एक निजी एजेंसी के माध्यम से हाउसकीपिंग कर्मचारी के रूप में नियुक्त इन कर्मचारियों को अचानक बुलाकर उनके आई-कार्ड और ड्रेस जमा करा लिए गए और अगले दिन से ड्यूटी पर नहीं आने के निर्देश दिए गए. अब SBI ने विभिन्न शाखाओं से अपने नियमित कर्मचारियों की तैनाती की है, ताकि गणना प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह तरीके से संचालित हो सके.

हाउसकीपिंग कर्मचारियों के नोट गिनने पर उठे थे सवाल

चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद इस बात पर भी सवाल उठे थे कि हाउसकीपिंग कर्मचारियों से करोड़ों रुपये के नकद चढ़ावे की गणना क्यों कराई जा रही थी. इसके बाद ट्रस्ट और बैंक ने पूरी व्यवस्था में व्यापक बदलाव का फैसला लिया.

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हटाए गए कर्मचारियों ने लगाए ये आरोप

हटाए गए कर्मचारियों का आरोप है कि निजी एजेंसी को प्रति कर्मचारी करीब 26 हजार रुपये का भुगतान किया जाता था, जबकि उन्हें केवल करीब 15 हजार रुपये वेतन मिलता था. कर्मचारियों का कहना है कि बिना किसी व्यक्तिगत गलती के उन्हें अचानक नौकरी से हटा दिया गया. हालांकि, इस संबंध में ट्रस्ट और एसबीआई की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.

पुराने ठेकेदार भी हटाए गए

सूत्रों के अनुसार, चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद केवल गणना व्यवस्था ही नहीं, बल्कि मंदिर परिसर में सफाई, रखरखाव और अन्य सहायक कार्यों से जुड़े कई पुराने ठेकेदारों को भी हटाया जा रहा है. उनकी जगह नई एजेंसियों और नए कर्मचारियों को जिम्मेदारी दी जा रही है. ट्रस्ट परिसर में संवेदनशील कार्यों से लेकर सामान्य व्यवस्थाओं तक पुराने नेटवर्क को समाप्त कर नई व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है.

पारदर्शिता के लिए उठाया कदम

यह पूरा बदलाव राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के बाद सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम माना जा रहा है.

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