बागपत में विजिलेंस टीम ने आज दोपहर जिला पूर्ति अधिकारी अनूप तिवारी को 40,000 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया. उसी मौके पर क्षेत्रीय पूर्ति अधिकारी जोगेंद्र सिंह को 10,000 रुपये लेते हुए पकड़ने का प्रयास किया गया, लेकिन वह कार्यालय से भागने में सफल रहे. 

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बताया गया कि दोनों अधिकारियों पर कथित रूप से कोटेदारों से कमिशन वसूलने का आरोप है. हाल ही इसी विभाग के दो इस्पेक्टरों को भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित किया गया था. इससे पहले राशन ढोने वाले ट्रक में ईंट पत्थर रखकर सस्ते गल्लों की दुकान पर राशन कम पहुंचाने का मामला सामने आया था.

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कमीशन का विरोध करने पर दुकान निरस्त करने की धमकी

कोटेदार नरेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि खाद्यान्न वितरण के बहाने कोटेदारों से लगातार कमीशन वसूला जाता है और आपत्ति करने पर राशन दुकान निरस्त करने की धमकी दी जाती है. पांच-छह माह से डीएसओ अनूप तिवारी और जोगेंद्र सिंह नियमित कमीशन की मांग कर रहे थे और दबाव के लिए कभी लिपिक तो कभी अन्य लोगों के माध्यम से बात करते थे. परेशान होकर कोटेदार ने विजिलेंस से शिकायत की.

विजिलेंस टीम जिला आपूर्ति अधिकारी से कर रही पूछताछ

विजिलेंस के अनुसार, योजनाबद्ध तरीके से आज कार्यालय में 40,000 रुपये अनूप तिवारी को दिए गए और टीम ने उन्हें पकड़ा जबकि 10000 हजार रुपये रिश्वत के लेकर जोगेंद्र सिंह भाग निकले. विजिलेंस उनकी तलाश कर रही है. आरोपित जिला आपूर्ति अधिकारी से विजिलेंस टीम पूछताछ में जुटी है.

दो इंस्पेक्टर हुए हुए थे निलंबित

आपको बता दें कि दो दिन पहले शासन ने विभाग के इंस्पेक्टर राहुल पटेल और दीपक कुमार को निलंबित किया था. उन पर भी आरोप लगे थे कि वे भी सस्ते गल्ले विक्रेताओं से अवैध वसूली करते थे, इनसे पहले अंगदपुर गांव के राशन विक्रेता ने आरोप लगाया था कि गोदाम से जब भी ट्रक राशन लेकर उनके दुकान के लिए चलता है तो उसमें कई कुंतल ईंट व पत्थर भर दिए जाते हैं और उतने ही वजन का राशन निकाल लिया जाता है. इस तरह आपूर्ति विभाग बागपत में भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है.

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