अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है. इस मामले में हिंदू धर्म सेना के प्रमुख और पूर्व कारसेवक संतोष दुबे ने रामजन्मभूमि थाने में एफआईआर दर्ज कराने के लिए तहरीर दी है. इस तहरीर में उन्होंने राम जन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय बंसल, अनिल मिश्र, गोपाल राव और चंपत राय के ड्राइवर राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू के खिलाफ तहरीर देकर सख्त कार्रवाई की माँग की है. 

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अयोध्या के रहने वाले संतोष दुबे ने आज मंगलवार को राम जन्मभूमि कोतवाली में दी  एफआईआर के लिए तहरीर दी है. इस तहरीर में उन्होंने सभी आरोपियों का पॉलीग्राफ टेस्ट कराए जाने की माँग की है. उन्होंने कहा कि इस घटना से राम भक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं. एबीपी न्यूज से बातचीत में संतोष दुबे ने कहा कि उन्हें एसआईटी पर भरोसा नही है. ये टीम दबाव में आ जायेगी. मुख्यमंत्री को खुद आकर स्थिति देखनी चाहिए. 

पूर्व कार सेवक ने FIR के लिए दी तहरीर

पूर्व कार सेवक संतोष दुबे थाने में तहरीर देने के बाद कहा कि राम जन्मभूमि की दान पेटिका से जो चोरी हुई है इसी संबंध में हमने पत्र दिया है और नामजद FIR कराने  आए हैं ताकि एसआईटी के पास ये बहाना न हो कि किसी ने तहरीर ही नहीं दी, ऐसे कैसे चलेगा इसलिए हमने तहरीर दी है. हमने इस तहरीर में चार राम धन के चोरों का नाम लिखा है. 

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उन्होंने कहा कि बचपन से हम सुनते थे कि 'राम नाम की लूट है लूट सके तो लूट..' अब तो 'राम धन की लूट है लूट सके तो लूट..' इसलिए हम यहां आए हैं. हम सरकार, प्रदेश के मुख्यमंत्री, देश के प्रधानमंत्री और अपने जनपद की पुलिस से उम्मीद करते हैं कि चोरों को गिरफ़्तार करें.  

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एसआईटी का कोई मतलब नहीं होता हैं. क्योंकि एसआईटी उन्हीं के दबाव में काम करेगी. इसलिए मुख्यमंत्री या तो स्वयं जाँच करें या पुलिस को छोड़ दें कि आप जाँच करें कि जाँच करो. हमारे राज्य की पुलिस मुर्दों से क़बूल करवा लेती है ये तो जिंदा चोर हैं सब कबूल करवा लेगी. 

जानें कौन हैं संतोष दुबे?

बता दें कि संतोष दुबे राम मंदिर आंदोलन में 16 वर्ष की आयु से जुड़े और बाबरी विध्वंस के मुख्य आरोपी भी रहे है. राम मंदिर आंदोलन के दौरान उन्हें चार गोलियां भी लगी थीं. 6 दिसम्बर 1992 को ढांचा तोड़ते समय उनकी 17 जगहों की हड्डी टूटी गई थी. 1994 और 2000 में उन पर एनएसए लगा और जेल भी जाना पड़ा था.

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