मुंबई क्राइम ब्रांच की क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट (CIU) और उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए कोलाबा इलाके से एक इनामी और वांटेड साइबर अपराधी को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार आरोपी की पहचान शिहान इश्तियाक शेख के रूप में हुई है, जो पिछले कई महीनों से फरार चल रहा था. यूपी STF ने उस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा था.

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आरोपी कोलाबा इलाके में रहकर एक ट्रेवल्स कंपनी में काम कर रहा था और वहीं से अपने साइबर अपराध नेटवर्क को संचालित कर रहा था. गिरफ्तारी के बाद यूपी STF की टीम ने तीन दिन की ट्रांजिट रिमांड हासिल की, जिसके बाद गुरुवार को आरोपी को लखनऊ ले जाया गया.

मुंबई से सिम कार्ड खरीदकर यूपी में बेचता था

जांच में सामने आया है कि शिहान शेख यूपी में सक्रिय एक बड़े साइबर ठगी गिरोह का अहम सदस्य था. वह मुंबई से बड़ी संख्या में सिम कार्ड खरीदकर यूपी ले जाता था और अपने गांव के लोगों व गिरोह के सदस्यों को 1000 से 1200 रुपये प्रति सिम की दर से बेचता था.

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इन सिम कार्डों को फर्जी आधार कार्ड के जरिए एक्टिवेट किया जाता था. जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इस पूरे नेटवर्क में कुछ टेलीकॉम कंपनियों के कर्मचारियों की मिलीभगत भी थी.

कंबोडिया में बैठे साइबर सरगनाओं को बेचे जाते थे सिम

एक्टिव होने के बाद ये सिम कार्ड कंबोडिया में बैठे साइबर सरगनाओं को बेचे जाते थे. इन्हीं सिम कार्डों का इस्तेमाल कर भारत में डिजिटल अरेस्ट, स्टॉक मार्केट ठगी और पार्सल स्कैम जैसे साइबर अपराधों को अंजाम दिया जाता था. अब तक यूपी में इस गिरोह द्वारा करीब 100 करोड़ रुपये के फ्रॉड की बात सामने आ चुकी है. STF के अनुसार, शेख और उसका गिरोह पिछले तीन वर्षों में करीब 10,000 सिम कार्ड एक्टिव कर चुका था.

 इस मामले में पहले ही कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें:

1.अग्रहरि कम्युनिकेशन का मालिक और गैंग लीडर ओमप्रकाश अग्रहरि2.वोडाफोन आइडिया के सेल्स एग्जीक्यूटिव शिवदयाल निषाद और जितेंद्र कुमार3. वकील व डिस्ट्रीब्यूटर राहुल पांडेय4.पीओएस एजेंट शिवबाबू5.रवि स्टूडियो का मालिक सुरेंद्र सिंह शामिल हैं6.टेलीकॉम कंपनियों में काम कर चुका था गैंग लीडर

STF की जांच में सामने आया है कि ओमप्रकाश अग्रहरि पहले हच, फिर वोडाफोन और बाद में जियो कंपनी में डिस्ट्रीब्यूटर व सेल्स एग्जीक्यूटिव की भूमिका निभा चुका था. वर्ष 2023 में वोडाफोन आइडिया की डिस्ट्रीब्यूटरशिप खत्म होने के बाद गिरोह ने फर्जी पीओएस एजेंट बनाकर सिम एक्टिवेशन का यह अवैध नेटवर्क खड़ा किया.

चित्रकूट में दर्ज हुई थी FIR

इस मामले में पहले चित्रकूट के राजापुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसे आगे की जांच के लिए यूपी STF को सौंपा गया. शिहान शेख की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों को कई और बड़े खुलासों की उम्मीद है. यह गिरोह देशभर में साइबर ठगी के लिए जिम्मेदार था और इसके और भी सदस्यों की तलाश जारी है.