राजस्थान में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू करने की दिशा में भजन लाल शर्मा सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. राज्य सरकार ने यूसीसी विधेयक का प्रारूप तैयार करने के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन कर दिया है. सरकार का दावा है कि इससे सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून लागू होंगे और महिलाओं को अधिक अधिकार तथा कानूनी समानता मिलेगी.

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सोमवार को शासन सचिवालय में आयोजित कार्यक्रम में संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल और गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने इसकी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में यूसीसी को लेकर आगे बढ़ने का फैसला लिया गया था, जिसके बाद अब विधेयक का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए समिति बनाई गई है.

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समिति में ये लोग होंगे शामिल

समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई करेंगी. समिति में सेवानिवृत्त आईएएस शत्रुघ्न सिंह, अतिरिक्त महाधिवक्ता बसंत सिंह छाबा, विधि विशेषज्ञ रामस्वरूप अग्रवाल और डॉ. शुचि चौहान को सदस्य बनाया गया है. अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) समिति के सदस्य सचिव होंगे.

सरकार ने गिनाए यूसीसी के फायदे

सरकार के अनुसार, यूसीसी लागू होने के बाद विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और भरण-पोषण जैसे मामलों में अलग-अलग पर्सनल लॉ की जगह एक समान कानून लागू होगा. प्रस्तावित प्रावधानों में विवाह और तलाक का अनिवार्य पंजीकरण, बहुविवाह पर रोक, लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन और पैतृक संपत्ति में बेटा-बेटी को समान अधिकार शामिल हैं.

आदिवासी समुदायों के परंपरागत रीति-रिवाज रहेंगे बरकरार

सरकार ने स्पष्ट किया है कि आदिवासी समुदायों के परंपरागत रीति-रिवाजों और उन्हें प्राप्त संवैधानिक संरक्षण को बरकरार रखा जाएगा. साथ ही कानून को अधिक समावेशी और पारदर्शी बनाने के लिए संभाग स्तर पर जनसंवाद आयोजित किए जाएंगे. आम नागरिक भी वेबसाइट के माध्यम से अपने सुझाव समिति को भेज सकेंगे.

विधेयक पर टिकीं सभी की नजरें

राजस्थान यूसीसी लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाने वाला देश का दूसरा राज्य बनने की ओर अग्रसर है. इससे पहले उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू किया जा चुका है. अब सभी की नजरें समिति की सिफारिशों और सरकार द्वारा तैयार किए जाने वाले अंतिम विधेयक पर टिकी हैं.

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