राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की रचना के 150 साल पूरे होने के मौके पर शुक्रवार (7 नवंबर) को समूचे राजस्थान में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. मुख्य कार्यक्रम राजधानी जयपुर के एसएमएस स्टेडियम में होगा, जहां हजारों लोग एक साथ राष्ट्रीय गीत का गान करेंगे.

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हालांकि, इस अवसर पर शिक्षा विभाग द्वारा जारी एक आदेश ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है. विभाग ने सभी दफ्तरों, स्कूलों और कॉलेजों के साथ ही मदरसों में भी राष्ट्रीय गीत का गायन अनिवार्य कर दिया है.

राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत अनिवार्य 

इसके अलावा, शुक्रवार (7 नवंबर) से शिक्षा और पंचायती राज विभाग के दफ्तरों में राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत को रोजाना गाना अनिवार्य कर दिया गया है. शिक्षा और पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर के अनुसार, सुबह के वक्त इसमें शामिल होने वाले कर्मचारियों की ही उपस्थिति (अटेंडेंस) मानी जाएगी.

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बीजेपी का समर्थन, कांग्रेस का विरोध

सरकार के इस कदम का राजस्थान बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ ने पुरजोर समर्थन किया है. उन्होंने कहा, "वंदे मातरम का मतलब मादरे वतन को सलाम करना है. ऐसे में अब किसी भी मुस्लिम को इसमें कोई एतराज नहीं होना चाहिए." उन्होंने कहा कि आज के लोग पढ़े-लिखे और जागरूक हैं, इसलिए वे एतराज नहीं करते और सभी इस पल को ऐतिहासिक बनाएंगे.

'BJP ध्यान भटकाने के लिए करती रहती है इस तरह के काम'

दूसरी तरफ, कांग्रेस पार्टी ने इसे "गैर-जरूरी" बताते हुए बीजेपी पर सियासत करने का आरोप लगाया है. राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि बीजेपी बुनियादी समस्याओं से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के काम करती रहती है.

डोटासरा ने कहा, "राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत को लेकर हर किसी के मन में सम्मान है और हर कोई इसका गान करता है, लेकिन भाजपा सिर्फ वोट बैंक की राजनीति करती है और लोगों को ऐसे आयोजनों के जरिए बांटने का काम करती है."