राजस्थान यूनिवर्सिटी (RU) एक बार फिर वैचारिक टकराव और विवादों का अखाड़ा बन गई है. शुक्रवार को यूनिवर्सिटी परिसर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के एक सहयोगी संगठन द्वारा आयोजित कार्यक्रम को लेकर जमकर बवाल हुआ.
कार्यक्रम का विरोध कर रहे कांग्रेस के छात्र संगठन भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) के कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी झड़प हो गई, जिसके बाद पुलिस ने 50 से अधिक छात्रों को हिरासत में ले लिया.
क्या है पूरा मामला और क्यों हुआ विरोध?
जानकारी के अनुसार, यूनिवर्सिटी कैंपस में 'मरुधरा नारी संस्थान' की ओर से महिला सशक्तिकरण पर एक गोष्ठी का आयोजन किया जा रहा था. बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम में RSS और बीजेपी से जुड़े पदाधिकारी शामिल थे.NSUI कार्यकर्ताओं का आरोप है कि शिक्षा के मंदिर (यूनिवर्सिटी) में केवल अकादमिक गतिविधियां होनी चाहिए. राजनीतिक विचारधारा से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन कर यूनिवर्सिटी का "भगवाकरण" करने की कोशिश की जा रही है, जिसका वे पुरजोर विरोध करेंगे.
बैरिकेड्स पर चढ़े छात्र, पुलिस से हुई धक्का-मुक्की
शुक्रवार (03 अप्रैल) को कार्यक्रम रुकवाने के लिए सैकड़ों की संख्या में NSUI कार्यकर्ता आयोजन स्थल की ओर कूच कर रहे थे. हालात को देखते हुए पुलिस ने यूनिवर्सिटी गेट पर पहले से ही भारी बैरिकेडिंग कर रखी थी. जब छात्रों को आगे बढ़ने से रोका गया, तो माहौल तनावपूर्ण हो गया. कई छात्र बैरिकेड्स पर चढ़ गए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे. इस दौरान पुलिस और छात्रों के बीच भारी धक्का-मुक्की हुई. बेकाबू होते हालात को देखते हुए पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया और हंगामा कर रहे 50 से अधिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर पुलिस वैन से अज्ञात स्थान पर भेज दिया.
पुलिस छावनी बना कैंपस, गहलोत ने उठाए सवाल
इस भारी विरोध-प्रदर्शन के बावजूद पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच कार्यक्रम को शांतिपूर्ण तरीके से शुरू कर दिया गया. एहतियात के तौर पर पूरी यूनिवर्सिटी को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है.
गौरतलब है कि RU में इस तरह का विवाद नया नहीं है. इससे पहले विजयदशमी पर आरएसएस के शस्त्र पूजन कार्यक्रम का भी NSUI ने कड़ा विरोध किया था. इस ताजा मामले पर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने भी सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा है कि शिक्षण संस्थानों में इस तरह के राजनीतिक कार्यक्रमों का आयोजन किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है.
फिलहाल यूनिवर्सिटी में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन इस घटना ने शैक्षणिक परिसरों में राजनीतिक दखलंदाजी की बहस को फिर से हवा दे दी है.
