राजस्थान सरकार ने बेरोजगार युवाओं को मिलने वाले बेरोजगारी भत्ते की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने का फैसला किया है. नई व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि योजना का लाभ केवल पात्र युवाओं तक ही पहुंचे और फर्जी दावों पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके. इसके लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद ली जाएगी, जो आवेदन और दस्तावेजों की निगरानी करेगा.

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नई व्यवस्था के तहत आवेदन से लेकर दस्तावेजों की जांच और सत्यापन तक का अधिकतर काम ऑनलाइन होगा. हर आवेदक का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा. AI सिस्टम आवेदन में दी गई जानकारी का विश्लेषण करेगा और अगर किसी दस्तावेज में गड़बड़ी, फर्जी जानकारी या एक ही व्यक्ति द्वारा बार-बार आवेदन करने का मामला सामने आता है तो सिस्टम तुरंत उसे चिन्हित कर देगा. इसके बाद संबंधित आवेदन की अलग से जांच की जाएगी.

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सरकारी रिकॉर्ड से होगा मिलान

सरकार ने अलग-अलग सरकारी विभागों के डेटाबेस को भी इस प्रक्रिया से जोड़ने की तैयारी की है. इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि आवेदक योजना की सभी पात्रता शर्तें पूरी करता है या नहीं.

अगर किसी युवक या युवती को पहले ही नौकरी मिल चुकी है या वह किसी अन्य कारण से योजना के लिए पात्र नहीं है, तो सिस्टम उसे खुद पहचान लेगा. ऑनलाइन सत्यापन पूरा होने के बाद ही बेरोजगारी भत्ता मंजूर किया जाएगा.

युवाओं को मिलेगी राहत

सरकार का कहना है कि नई डिजिटल व्यवस्था से फर्जी लाभार्थियों पर रोक लगेगी और सरकारी धन की भी बचत होगी. वहीं, वास्तविक जरूरतमंद युवाओं को बिना देरी के योजना का लाभ मिल सकेगा. सबसे बड़ी राहत यह होगी कि आवेदकों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, क्योंकि अधिकांश प्रक्रिया ऑनलाइन ही पूरी होगी.

सरकार को उम्मीद है कि AI आधारित यह सिस्टम ई-गवर्नेंस को और मजबूत करेगा और बेरोजगारी भत्ता योजना को पहले से अधिक पारदर्शी, तेज और भरोसेमंद बनाएगा.

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