राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने फर्जी डिग्री और प्रमाणपत्रों के माध्यम से नौकरी हासिल करने वालों के खिलाफ बड़ा अभियान छेड़ रखा है. पिछले 5 वर्षों से चल रही जांच में सामने आया है कि करीब 25 से अधिक विश्वविद्यालयों ने फर्जी डिग्री, प्रमाण पत्र, अंक तालिकाएं, खेल प्रमाण पत्र उपलब्ध कराए हैं. इन पर अब सरकार की गाज गिर सकती है. साथ ही फर्जी डिग्रियों से नौकरी पाने वालो पर भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है.

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दरअसल, SOG को लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर जब पड़ताल शुरू हुई, तब बड़े खुलासे हुए है. प्रदेश के कई बड़े विश्वविद्यालय इस खेल में शामिल थे, जिनमें OPJS यूनिवर्सिटी में SOG ने स्टिंग ऑपरेशन कर फर्जी गिरोह का पर्दाफाश किया था. एसओजी को यूनिवर्सिटी से करीब 50 से अधिक फर्जी डिग्रियां मिली थी.

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जांच के दायरे में मध्य प्रदेश की 2 यूनिवर्सिटी

इसके अलावा SOG ने PTI भर्ती-2022 में चयनित अभ्यर्थियों की डिग्रियों की जांच के दौरान मध्यप्रदेश की दो निजी यूनिवर्सिटियों को भी जांच के दायरे में लिया. इनमें Rabindranath Tagore University तथा Shri Sathya Sai University of Technology and Medical Sciences शामिल हैं. आरोप है कि कुछ अभ्यर्थियों ने इन संस्थानों से जारी संदिग्ध BPEd डिग्रियों के आधार पर सरकारी नौकरी प्राप्त की. SOG ने रिकॉर्ड जब्त कर विस्तृत जांच शुरू की है.

फर्जी डिग्री के जरिये हासिल की नौकरी

SOG एडीजी विशाल बंसल ने बताया कि कुछ अभ्यर्थियों ने भर्ती परीक्षाओं में डमी कैंडिडेट बैठाकर परीक्षा पास की और बाद में फर्जी बीएससी डिग्री लगाकर नौकरी हासिल कर ली. ऐसे ही एक मामले में SOG ने फर्जी डिग्री उपलब्ध कराने वाले आरोपी को गिरफ्तार किया था.

फर्जी प्रमाणपत्रों से कई अभ्यर्थियों ने लिया प्रवेश

हाल ही में SOG ने फर्जी FMGE (फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जाम) प्रमाणपत्र मामले में भी कार्रवाई की. जांच में आरोप सामने आया कि विदेश से MBBS करने वाले कुछ अभ्यर्थियों ने कथित रूप से नकली प्रमाणपत्रों के जरिए मेडिकल क्षेत्र में प्रवेश हासिल किया.

SOG की रडार पर देश भर की 25 यूनिवर्सिटी

SOG जांच में OPJS यूनिवर्सिटी, जेएस यूनिवर्सिटी, सत्य साईं मध्यप्रदेश की यूनिवर्सिटी, उत्तराखंड की हिमालयन गड़वाल यूनिवर्सिटी, कलिंगा यूनिवर्सिटी, सिरलॉक्स यूनिवर्सिटी, मेवाड यूनिवर्सिटी समेत 25 से ज्यादा यूनिवर्सिटी एसओजी की रडार पर है.

दलालों और अन्य लोगों की भूमिका की हो रही जांच

SOG अधिकारियों का कहना है कि फर्जी डिग्री, डमी कैंडिडेट और भर्ती परीक्षा घोटालों के बीच गहरे संबंध सामने आ रहे हैं. जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कितने अभ्यर्थियों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरियां हासिल कीं और इस पूरे नेटवर्क में विश्वविद्यालयों, दलालों तथा अन्य लोगों की क्या भूमिका रही.

फिलहाल, SOG की लगातार कार्रवाई से प्रदेश में भर्ती परीक्षाओं और शैक्षणिक संस्थानों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं. आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है.

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