कार्रवाई के दौरान अधीक्षण अभियंता सहित अन्य अधिकारी कार्यालय छोड़कर बाहर निकल गए. सभी कर्मचारियों को भी बाहर किया गया और न्यायालय के निर्देशानुसार मुख्य द्वार को सील कर दिया गया. अधीक्षण अभियंता ने केवल 8 लाख रुपये आंशिक रूप से देने की पेशकश की, जिसे अदालत ने अस्वीकार करते हुए सम्पूर्ण राशि का एकमुश्त भुगतान करने पर जोर दिया.
दर्दनाक हादसा- करंट से गई जान
पीड़ित पक्ष की ओर से वकील सुमेर सिंह राजपुरोहित ने बताया कि मामला 12 अगस्त 2015 का है. मृतक भंवर सिंह अपने भाई भीम सिंह के साथ अखापुरा गांव के सोदरला स्थित कृषि कुएं पर फसल की रखवाली कर रहा था. रात के समय पेशाब के लिए बाहर निकले भंवर सिंह का पैर डीपी के अर्थिंग तार से छू गया, जिससे करंट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई. पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि जोधपुर विद्युत वितरण निगम द्वारा लगाए गए ट्रांसफॉर्मर की अर्थिंग का नियमित रखरखाव नहीं किया गया था, जिससे यह हादसा हुआ.
इस घटना के बाद पीड़ित पक्ष की ओर से वकील सुमेर सिंह राजपुरोहित ने अदालत में याचिका दायर की. 21 सितंबर 2021 को न्यायालय ने निगम को 10.83 लाख रुपए मुआवजा तथा 11 अगस्त 2017 से वसूली की तारीख तक 7.5 प्रतिशत सालाना ब्याज देने के आदेश दिए थे. इसके बावजूद निगम द्वारा आदेश की अवहेलना की गई, जिससे अदालत को कठोर कदम उठाना पड़ा.
परिवार की हालत दयनीय
मृतक भंवर सिंह की पत्नी पहले ही स्वर्गवासी हो चुकी थी. उनकी मां गंगा कंवर का भी 4 महीने पूर्व निधन हो गया. भंवर सिंह के 3 बच्चे हैं. एक बालिक और दो नाबालिग, जो पढ़ाई छोड़कर बाहर होटल में बर्तन धोने का कार्य करने को मजबूर हो गए हैं. वकील राजपुरोहित के अनुसार, यदि समय पर मुआवजा मिल गया होता, तो बच्चों की पढ़ाई और भविष्य सुरक्षित रह सकता था.यह मामला सरकारी लापरवाही और न्यायालय के आदेशों की अनदेखी की गंभीर तस्वीर प्रस्तुत करता है. अब न्यायालय की सख्ती के बाद पीड़ित परिवार को न्याय की आशा जगी है.