मानसून से पहले स्कूलों की स्थिति सुधारने को लेकर राजस्थान सरकार ने सख्त निर्देश दिए हैं. इसी क्रम में राजस्थान सरकार ने शुक्रवार (10 अप्रैल) को अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य भर में सभी जर्जर, लेकिन मरम्मत योग्य स्कूल भवनों का जीर्णोद्धार मानसून शुरू होने से पहले सुनिश्चित किया जाए. इस संबंध में शिक्षा विभाग की प्रमुख योजनाओं, गतिविधियों और अत्यावश्यक मुद्दों का आंकलन करने के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्कूल शिक्षा) राजेश यादव की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की गई.
मामले की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव ने पिछले साल झालावाड़ में हुई दर्दनाक घटना का उल्लेख किया. इस घटना में एक स्कूल भवन की छत गिरने से सात बच्चों की मौत हो गई थी और 25 से अधिक बच्चे घायल हो गए थे. इस घटना ने सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे.
नए स्कूल भवनों के निर्माण की योजना
अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश ने इस बात पर जोर दिया कि झालावाड़ जैसी घटना दोबारा नहीं होनी चाहिए और कमजोर ढांचों की पहचान और मरम्मत के लिए समयबद्ध कार्रवाई का आह्वान किया. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जहां भी आवश्यक हो, नए स्कूल भवनों के निर्माण के लिए एक व्यापक कार्य योजना तैयार करें और उसे लागू करें, खासकर उन क्षेत्रों में जहां बुनियादी ढांचा असुरक्षित या अपर्याप्त है. इस बैठक के दौरान राजेश यादव ने कई प्रमुख योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की और उनके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए आवश्यक दिशानिर्देश जारी किए. इनमें समग्र शिक्षा, पीएम-श्री योजना, फ्री यूनिफॉर्म डीबीटी, आईसीटी प्रयोगशालाएं, टैबलेट वितरण, ज्ञान संकल्प शामिल हैं.
स्कूली शिक्षा मजबूत करने पर जोर
उन्होंने राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक बोर्ड और राजस्थान राज्य मुक्त विद्यालय जैसी प्रमुख संस्थाओं के कामकाज की समीक्षा की. इसके साथ ही मध्याह्न भोजन योजना के कार्यान्वयन का भी जायजा लिया और परिणामों में सुधार लाने में भाषा और पुस्तकालय विभागों की भूमिका का भी आकलन किया. स्कूली शिक्षा को मजबूत करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए उन्होंने विभागों के बीच बेहतर समन्वय और सभी योजनाओं के समय पर कार्यान्वयन का आह्वान किया ताकि छात्रों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुरक्षित बुनियादी ढांचा सुनिश्चित किया जा सके.
