राजस्थान में सरकारी स्कूलों की खस्ताहाल व्यवस्थाओं और बदहाली के बीच राज्य की भजनलाल शर्मा सरकार ने एक बेहद विवादित आदेश जारी किया है. शिक्षा विभाग ने स्कूलों की कमियों को सुधारने के बजाय, वहां मीडिया और अन्य बाहरी लोगों की 'नो एंट्री' का फरमान सुना दिया है. सरकार के इस आदेश के बाद प्रदेश में बड़ा राजनीतिक बवाल खड़ा हो गया है. विपक्षी दल इसे 'तुगलकी फरमान' बताते हुए सरकार पर अपनी नाकामियां और बदहाली छिपाने का सीधा आरोप लगा रहे हैं.

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माध्यमिक शिक्षा निदेशक ललित कुमार ने 16 अगस्त को एक नया आदेश जारी किया है. इसके मुताबिक, अब प्रदेश के किसी भी सरकारी स्कूल में कोई भी बाहरी व्यक्ति बिना प्रिंसिपल की लिखित अनुमति के प्रवेश नहीं कर सकेगा. मीडिया या कोई भी अन्य व्यक्ति न तो स्कूल परिसर में जा सकेगा, न बच्चों से बात कर सकेगा और न ही बदहाली की तस्वीरें या वीडियो बना सकेगा. आदेश में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि कोई इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो बच्चों की गरिमा और निजता के नाम पर उसके खिलाफ पॉक्सो (POCSO), आईटी एक्ट और अन्य गंभीर आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा. आदेश जारी होते ही इसे स्कूलों के गेट पर चस्पा भी कर दिया गया है.

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क्यों जारी हुआ यह विवादित फरमान?

दरअसल, प्रदेश में 84 हजार से ज्यादा क्लासरूम जर्जर हालत में हैं, जिन्हें कोर्ट के आदेश पर बंद करना पड़ा है. छात्र बिजली-पानी, शौचालय और शिक्षकों की कमी को लेकर आए दिन सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं. पिछले दिनों मीडिया और विपक्षी दलों ने अलवर व जयपुर के स्कूलों की जमीनी हकीकत सार्वजनिक कर दी थी, जिस पर हाईकोर्ट ने भी सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी. माना जा रहा है कि अपनी किरकिरी से बचने और कमियों पर पर्दा डालने के लिए सरकार ने यह आदेश जारी किया है.

शिक्षा मंत्री के अजीबोगरीब बोल

इस आदेश पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का बयान भी चर्चा का विषय बन गया है. पहले उन्होंने मीडिया से कहा, "मैं कुछ लोगों से सुन रहा हूं कि विद्यालय में किसी के जाने और रिकॉर्डिंग पर प्रतिबंध लगाया गया है." अपने ही विभाग के आदेश को 'सुना है' कहने के बाद, मंत्री ने सफाई दी कि यह फैसला बच्चों की निजता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है.

विपक्ष का कड़ा प्रहार, विधानसभा में गूंजेगा मुद्दा

शिक्षा विभाग के इस आदेश पर मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने कड़ा ऐतराज जताया है. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है. टीकाराम जूली ने इसे अलोकतांत्रिक करार देते हुए ऐलान किया है कि 20 अगस्त से शुरू हो रहे राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया जाएगा और सरकार को यह तानाशाही आदेश वापस लेने पर मजबूर किया जाएगा.

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