राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आगामी बजट सत्र को लेकर राज्य सरकार पर कड़े प्रहार किए हैं. उन्होंने कहा कि कांग्रेस विधायक दल ने सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर ली है और यह सत्र सरकार के दो साल के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड तय करेगा. जूली ने मीडिया से बातचीत में राज्य सरकार पर हमला बोला.

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नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इस सरकार की एक नई परिपाटी बन गई है, पहले बजट में बढ़ा-चढ़ाकर घोषणाएं करना और बाद में 'फिजिबिलिटी नहीं है' (साध्य नहीं है) का हवाला देकर उन्हें निरस्त कर देना. इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि घोषणा के बाद फिजिबिलिटी चेक की जा रही है, जबकि यह काम पहले होना चाहिए. आगामी बजट भी महज एक औपचारिकता रहने वाला है.

'जनता का पैसा ब्याज में जा रहा'

जूली ने बताया कि विपक्ष ने सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन की पूरी डिटेलिंग कर ली है. एफआरबीएम (FRBM) की लिमिट पार की जा रही है और जनता की गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा केवल ब्याज चुकाने में जा रहा है. केंद्र और राज्य सरकार में होड़ मची है कि कौन देश और प्रदेश को ज्यादा कर्ज में डुबो सकता है.

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'प्रदेश में कोई सुरक्षित नहीं'

कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में कोई सुरक्षित नहीं है. अस्पतालों में आग लग रही है, स्कूल गिर रहे हैं, सड़कों पर डंपर कुचल रहे हैं और गैंगस्टर्स खुलेआम गोलियां चला रहे हैं. जनहित की योजनाएं ठप हैं, पेंशन, पालनहार और स्कॉलरशिप समय पर नहीं मिल रही. किसान यूरिया, बीज और खाद के लिए तरस रहा है. भर्तियां अटकी हुई हैं.

'बेलगाम नौकरशाही और प्रोटोकॉल का उल्लंघन'

जूली ने आरोप लगाया कि सरकार में ब्यूरोक्रेसी इतनी हावी हो चुकी है कि मंत्रियों और विधायकों की भी सुनवाई नहीं हो रही है. सत्ता और संगठन में भयंकर टकराव है. मंत्री कलेक्टर से लड़ रहे हैं और अधिकारी केंद्रीय मंत्रियों के पत्र तक को नजरअंदाज कर रहे हैं. 

उन्होंने कहा कि प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया जा रहा है, विधायक पीछे खड़े रहते हैं और कलेक्टर सीट पर बैठे रहते हैं. विपक्ष के विधायकों के नाम शिलान्यास और उद्घाटन पट्टिकाओं से हटाए जा रहे हैं, जबकि बीजेपी पदाधिकारियों के नाम नियमों के विरुद्ध लिखे जा रहे हैं.

'महिलाओं की पायल-बिछिया तक विकवा दी'

महंगाई पर कटाक्ष करते हुए जूली ने कहा कि जो लोग 'मंगलसूत्र' की बात करते थे, उनके राज में महंगाई ने गरीब महिलाओं की पायल और बिछिया तक बिकवा दी है. सोना-चांदी आम आदमी की पहुंच से बाहर हो चुका है. डॉलर के रेट और पेट्रोल-डीजल के दामों पर सरकार चुप्पी साधे बैठी है.

मनरेगा का नाम बदलने पर भी घेरा

टीकाराम जूली ने केंद्र सरकार पर मनरेगा योजना को खत्म करने का गंभीर आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि सरकार ने भगवान राम का नाम लेकर इस योजना को कमजोर करने की साजिश रची है ताकि विपक्ष विरोध न कर सके. उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "इन्होंने नरेगा का 'जी रामजी' (अंतिम संस्कार/खात्मा) कर दिया है. ये पाप के भागी बनेंगे. पहले मनरेगा में 90 फीसदी पैसा केंद्र और 10% राज्य देता था, जिसे अब 60:40 कर दिया गया है. 

उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार के पास पैसा है नहीं, नतीजा यह होगा कि गांवों में काम बंद कर दिए जाएंगे. पहले 'काम के आधार पर बजट' मंजूर होता था, अब 'बजट के आधार पर काम' मिलेगा. यह योजना के मूल कानून को खत्म करने जैसा है.

'गांवों से शहरों की ओर बढ़ेगा पलायन'

जूली ने कहा कि इससे गांवों से शहरों की ओर पलायन बढ़ेगा और गरीब वापस बंधुआ मजदूरी की ओर धकेले जाएंगे. कांग्रेस ने जो फूड सिक्योरिटी, पेंशन और रोजगार का ढांचा खड़ा किया था, उसे यह सरकार ध्वस्त कर रही है. कांग्रेस इसका जोरदार विरोध करेगी.

'सिर्फ भाषणों से नहीं चलती सरकार'

जूली ने जोर देते हुए कहा कि विधानसभा सत्र में इन सभी मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा जाएगा. सरकार अब केवल कोरे भाषणों से काम नहीं चला सकती, उन्हें जनता के प्रति जवाबदेह होना पड़ेगा.