राजस्थान सरकार द्वारा कुछ हफ्तों पहले ही अमल में आए धर्मांतरण विरोधी नए कानून को लेकर प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने इसे असंवैधानिक बताते हुए सोमवार (5 जनवरी) को सड़कों पर उतरकर राजधानी जयपुर में प्रदर्शन किया. 

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इससे पहले शहीद स्मारक पर जनसभा भी की गई. प्रदर्शन और सभा में कई संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए.प्रदर्शन के दौरान कहा गया कि इस कानून के जरिए अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न किए जाने की आशंका है. इसे फौरन वापस ले लिया जाना चाहिए. 

प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में की रद्द करने की मांग

प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट से भी इस कानून को रद्द किए जाने की गुहार लगाई है. इस प्रदर्शन को विपक्षी पार्टियों ने भी अपना समर्थन दिया. राजस्थान मदरसा बोर्ड के चेयरमैन एमडी चोपदार भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए.

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लोगों की ओर से इस कानून के जरिए कई आरोप लगाए गए हैं. प्रदर्शनकारियों ने इस कानून को अधिकारों का हनन बताया है. वहीं आरोप लगाते हुए कहा है कि प्रशासन को दिए गए जरूरत से ज्यादा अधिकारों के तहत की जाने वाली कार्रवाई इस कानून को तहत लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है.

राज्यपाल ने दी कानून को मंजूरी

राजस्थान में काफी लंबे समय से अटका धर्मांतरण बिल अब कानून बन गया है. विधानसभा में पेश किए जाने के बाद इसे पारित किया गया. बिल को राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने मंजूरी दे दी. राज्यपाल की मंजूरी के बाद इस बिल ने कानून का रूप ले लिया. साथ ही उन्होंने बिल का गजट नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया. 

राजस्थान सरकार का यह नया कानून 'राजस्थान विधि विरुद्ध धर्म समपरिवर्तन अधिनियम, 2025' के नाम से जाना जाएगा. इसमें आजीवन कारावास तक की सजा और 50 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है. यानी अगर कोई व्यक्ति जबरन, लालच या धोखे से किसी का धर्म बदलवाता है, तो उसे कड़ी सजा दी जा सकेगी. साथ ही धर्म परिवर्तन से जुड़े सभी अपराध गैर-जमानती होंगे. यानी आरोपी को आसानी से जमानत नहीं मिलेगी.