राजस्थान विधानसभा में गुरुवार को विपक्ष के हंगामे के बीच वंदे मातरम को लेकर सियासत गरमा गई. कांग्रेस विधायकों के विधानसभा के मुख्य गेट के बाहर धरना देने और सदन की कार्यवाही में शामिल नहीं होने पर बीजेपी ने सवाल उठाए. भजनलाल सरकार के मंत्रियों ने आरोप लगाया कि कांग्रेस विधायक जानबूझकर सदन से दूर रहे, क्योंकि उन्हें वंदे मातरम के गान में शामिल होना पड़ता.

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कैबिनेट मंत्री अविनाश गहलोत और गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेडम ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि वंदे मातरम से बचना और इसका विरोध करना कांग्रेस की पुरानी आदत रही है. मंत्रियों का आरोप है कि कांग्रेस विधायक सदन के अंदर आते तो उन्हें वंदे मातरम के गान में शामिल होना पड़ता और ऐसा होने पर गांधी परिवार से जुड़े उनके नेता नाराज हो जाते.

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बीजेपी का कांग्रेस विधायकों पर आरोप

बीजेपी सरकार के मंत्रियों ने कहा कि गांधी परिवार की नाराजगी से बचने के लिए कांग्रेस विधायकों ने सोची-समझी रणनीति के तहत विधानसभा के बाहर हंगामा किया और सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया. बीजेपी नेताओं ने इसे कांग्रेस की राष्ट्रगीत के प्रति सोच से जोड़ते हुए हमला बोला.

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वहीं, बीजेपी के आरोपों के बाद कांग्रेस ने भी पलटवार किया. विधानसभा में विपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने कहा कि कांग्रेस को बदनाम करने के लिए सरकार ने जानबूझकर विधानसभा का गेट बंद कराया था, ताकि कांग्रेस विधायक सदन के अंदर नहीं जा सकें और बाद में उन पर वंदे मातरम से बचने के आरोप लगाए जा सकें. जूली ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि उसे वंदे मातरम के बारे में कांग्रेस को सीख देने का अधिकार नहीं है.

उन्होंने आरोप लगाया कि आजादी से पहले आरएसएस और बीजेपी से जुड़े लोग अंग्रेजों के डर से वंदे मातरम का गान करने से बचते थे. जूली ने कहा कि अब बीजेपी वंदे मातरम के मुद्दे पर राजनीति कर रही है. इस तरह गुरुवार को विधानसभा के हंगामे के बीच वंदे मातरम का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया और सत्ता पक्ष-कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए.

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