राजस्थान के कोटा शहर में एक प्रार्थना सभा के दौरान ईसाई मिशनरियों द्वारा राज्य सरकार को 'शैतान की सरकार' कहने का मामला सामने आया है. वीडियो वायरल होने के बाद हिंदू संगठनों ने जोरदार विरोध किया और शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने नए धर्म परिवर्तन कानून के तहत पहली FIR दर्ज कर ली है.

कैसे शुरू हुआ विवाद

कोटा के बोरखेड़ा इलाके स्थित बीरशेबा चर्च में 4 से 6 नवंबर तक प्रार्थना सभा आयोजित की गई थी. इसे सत्संग का नाम दिया गया था और इसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए, जिनमें कई हिंदू समुदाय के लोग भी थे. कार्यक्रम में कुछ लोगों ने मंच से बताया कि वे पहले हिंदू थे और बाद में ईसाई धर्म अपनाने के बाद जीवन में बदलाव आने की बातें कही.

इसी दौरान दिल्ली से आए पादरी चांडी वर्गीज ने मंच से ऐसा बयान दे दिया जिसने माहौल गर्म कर दिया. वायरल वीडियो में वह कहते दिखे “राजस्थान में शैतान का राज है, अब यह राज नहीं चलेगा. यहां मसीहियत का राज होगा और प्रभु यीशु की कृपा सब पर बरसेगी.”

हिंदू संगठनों ने किया विरोध

जैसे ही वीडियो सामने आया, विश्व हिंदू परिषद समेत कई संगठनों ने इसे धर्मांतरण के लिए उकसाने और हिंदू धर्म के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करार दिया. संगठनों ने प्रदर्शन कर चर्च और मिशनरियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की.

शिकायत मिलने के बाद कोटा पुलिस तुरंत सक्रिय हुई और दो ईसाई मिशनरियों के खिलाफ बीएनएस की धाराओं के साथ-साथ राजस्थान धर्मांतरण निरोधक कानून, 2024 की धारा 3 और 5 के तहत केस दर्ज कर लिया. गौरतलब है कि यह कानून 29 अक्टूबर से लागू हुआ है और इसी कानून में यह पहला केस बताया जा रहा है.

पुलिस का कहना है कि वीडियो की गहन जांच की जा रही है और आयोजकों से पूछताछ भी होगी. जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी.

राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाया है. सरकार का कहना है कि किसी भी तरह से धर्म परिवर्तन कराने या उसके लिए उकसाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

कोटा से विधायक और कैबिनेट मंत्री मदन दिलावर ने भी इस मामले पर नाराजगी जताते हुए कहा कि नया कानून लागू होने के बाद भी ऐसा दुस्साहस किया जाना बेहद गंभीर है. दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी.

क्यों बढ़ी मामले की संवेदनशीलता

पहली बार नए धर्म परिवर्तन कानून के तहत मामला दर्ज होना, पादरी के विवादित बयान और हिंदू संगठनों का विरोध, इन सब कारणों से यह मामला राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील हो गया है. 

कई लोग इसे धार्मिक भावना भड़काने की कोशिश बता रहे हैं, वहीं चर्च से जुड़े लोग कहते हैं कि यह सिर्फ धार्मिक सभा थी और वीडियो को संदर्भ से हटकर दिखाया जा रहा है.