राजस्थान के झुंझनू जिले के सूरजगढ़ से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां इंस्टाग्राम पर प्रेमिका द्वारा ब्लॉक किए जाने से आहत एक युवक ने आत्महत्या की कोशिश की, लेकिन जब खुद की गोली हाथ में लगी तो उसने पुलिस को गुमराह करने के लिए मनगढ़ंत कहानी गढ़ दी. हालांकि सूरजगढ़ पुलिस की पैनी जांच के आगे आरोपी की यह चालबाजी टिक नहीं सकी. पुलिस जांच में युवक की पोल खुल गई. युवक ने खुद को गोली मारने के बाद पुलिस को अन्य लोगों द्वारा गोली मारने की झूठी सूचना दी.

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एसपी ने दी यह जानकारी

एसपी बृजेश ज्योति उपाध्याय ने बताया कि रविवार (28 दिसंबर) को काकोडा निवासी अजय उर्फ दीपू (23) ने एम्बुलेंस को फोन कर सूचना दी कि वह अपने घर पर था, तभी दो अज्ञात बदमाशों ने उस पर फायरिंग कर दी और मौके से फरार हो गए. घायल अवस्था में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां दो दिनों तक वह पुलिस और डॉक्टरों को यही बताता रहा कि उस पर जानलेवा हमला हुआ है. पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की, लेकिन युवक के बयानों में विरोधाभास दिखाई देने लगा.

पुलिस पूछताछ में उगला सच

बुधवार (31 दिसंबर) को अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद जब थानाधिकारी रणजीत सिंह सेवदा के नेतृत्व में पुलिस टीम ने अजय से सख्ती से पूछताछ की, तो वह टूट गया और सच उगल दिया. आरोपी ने बताया कि वह एक लड़की से बेहद प्यार करता था. इंस्टाग्राम पर हुई दोस्ती के बाद जब लड़की ने उसे ब्लॉक कर दिया, तो वह गहरे तनाव में चला गया और आत्महत्या करने का मन बना लिया.

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लोड करते समय चली गोली

आरोपी ने कबूल किया कि रविवार (28 दिसंबर) की शाम करीब 7 बजे जब वह आत्महत्या करने के लिए अवैध देशी कट्टे को लोड कर रहा था, तभी अचानक ट्रिगर दब गया. गोली सीधे उसके बाएं हाथ में जा लगी. दर्द से कराहते युवक ने पकड़े जाने के डर से हथियार को एक प्लास्टिक की थैली में लपेटा और घर के पास ही ट्यूबवेल के स्टार्टर के नीचे छिपा दिया. 

गोली लगने के बाद खुद ही एम्बुलेंस को फोन कर हमले का ड्रामा रचा. पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में हुई इस कार्रवाई में पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर ट्यूबवेल से एक अवैध देशी कट्टा और आठ जिंदा कारतूस बरामद किए हैं. आरोपी के पास इन हथियारों का कोई लाइसेंस नहीं था, जिसके बाद उसे आर्म्स एक्ट के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है.

मामले का खुलासा करने में थानाधिकारी रणजीत सिंह सेवदा, एएसआई प्रदीप कुमार, हेड कांस्टेबल महेन्द्र सिंह, कांस्टेबल राजकुमार, महेश कुमार और चालक परमेन्द्र की मुख्य भूमिका रही. पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि आरोपी यह अवैध हथियार और इतनी बड़ी संख्या में कारतूस कहां से लेकर आया था.