जयपुर में प्रशासन ने शनिवार (20 दिसंबर) से पुराने शहर में बैटरी रिक्शा को चलाए जाने पर पाबंदी लगा दी है. यहां पर करीब 80 हजार बैटरी रिक्शा संचालित होते हैं. इनमें से लगभग 30 हजार बैटरी रिक्शा पुराने शहर यानी परकोटे में चलते थे. पिंक सिटी जयपुर में प्रशासन का यह आदेश लोगों के लिए मुसीबत बन गया है. प्रशासन के इस आदेश से जहां हजारों लोग बेरोजगार हो गए हैं, वहीं पुराने शहर में रहने वाले लोगों को आवागमन में असुविधा हो रही है. इसी बीच प्रशासन की सख्ती के खिलाफ विरोध भी शुरू हो गया है. 

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इस दिन तक रहेगी पाबंदी 

यह पाबंदी फिलहाल 10 जनवरी तक लागू रहेगी, लेकिन उसके बाद भी इस इलाके में चलने वाले बैटरी रिक्शा के रजिस्ट्रेशन चेक किए जाएंगे. उनकी कलर कोडिंग की जाएगी और फिर उन्हें सीमित रूट पर चलने की इजाजत दी जाएगी. प्रक्रिया पूरी होने में तकरीबन दो महीने का समय लग सकता है. 

प्रशासन ने न सिर्फ पुराने शहर में बैटरी रिक्शा के चलने पर पाबंदी लगा दी है, बल्कि इस पर सख्ती से अमल भी कराया जा रहा है. रोजाना सैकड़ों की संख्या में बैटरी रिक्शा को जब्त कर उन्हें डंपिंग यार्ड में भेजा जा रहा है. 

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रिक्शा बैन करने पर प्रशासन ने क्या कहा?

प्रशासन की तरफ से दलील दी गई है कि पुराने साल के आखिरी और नए साल के शुरुआती दस दिनों में शहर में बड़ी संख्या में पर्यटक घूमने के लिए आते हैं. ऐसे में बैटरी रिक्शा की वजह से जाम लगता है, इसलिए इन्हें फिलहाल बंद कराकर आगे इनको सीमित दायरे में चलने की इजाजत दी जाएगी. 

अचानक आए इस आदेश से तीस हजार के करीब बैटरी रिक्शा संचालक बेरोजगार हो गए हैं. उनका कहना है कि ट्रैफिक जाम अकेले उनकी वजह से नहीं होता है. फुटपाथ पर दुकान लगती हैं. पक्की दुकान वाले सामान बाहर रखते हैं. ऑटो और दूसरे वाहन भी मनमाने तरीके से चलते हैं. जाम के लिए सिर्फ वह ही जिम्मेदार नहीं है.

रिक्शा चालकों के सामने रोजी-रोटी का संकट

प्रशासन के इस फैसले से रिक्शा चालकों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है. उनका कहना है कि प्रशासन को कुछ शर्तों के साथ चलाने की इजाजत दे देनी चाहिए. दूसरी तरफ पुराने शहर में बैटरी रिक्शा बंद किए जाने से ऑटो वाले अब मनमाना किराया वसूल रहे हैं. 

पुराने शहर में रहने और यहां कारोबार करने व आने जाने वाले लोग अब या तो पैदल चलने को या फिर ऑटो वालों को मुंहमांगा किराया देने को मजबूर हैं. उनका कहना है कि बैटरी रिक्शा 10 से 20 रुपए में उन्हें एक से दूसरी जगह पहुंचा देता था. ऑटो वाले इसी दूरी का 50 या इससे ज्यादा रुपए ले रहे हैं. 

रिक्शा चालकों के खिलाफ कार्रवाई पर विरोध प्रदर्शन

बैटरी रिक्शा वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई किए जाने को लेकर कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन भी हुआ है. अब सवाल यह है कि 10 जनवरी के बाद प्रशासन फिर से इन्हें चलने की इजाजत देता है या नहीं. जयपुर में टूरिस्ट सीजन मकर संक्रांति के बाद तक चलता है और कलर कोडिंग के काम में करीब दो महीने का वक्त लगने की उम्मीद है. बहरहाल प्रशासन के फैसले से न बैटरी रिक्शा संचालक और न ही आम नागरिक व टूरिस्ट खुश हैं.