राजस्थान के जैसलमेर शहर में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब शहर के बाहरी इलाके में बड़ी संख्या में गोवंश के शव खुले में पड़े मिले. बताया जा रहा है कि यहां करीब पांच सौ गोवंश के शव खुले में फेंके गए थे. शवों से उठ रही बदबू और गंदगी के कारण आसपास के लोगों का जीना मुश्किल हो गया. मामले का वीडियो सामने आने के बाद नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए. बड़ी संख्या में गोवंश की मौत की वजह भी अभी तक सामने नहीं आई है. इन गोवंश की मौत गर्मी से हुई या किसी दूसरी वजह से, यह साफ होना अभी बाकी है.

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स्थानीय लोगों का कहना है कि कई दिनों से इलाके में तेज बदबू फैल रही थी. गर्मी के मौसम में हालत और खराब हो गई। खुले में पड़े शवों के कारण संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ गया था. लोगों ने आरोप लगाया कि जिम्मेदार एजेंसियों ने समय रहते ध्यान नहीं दिया, जिसकी वजह से हालात बिगड़ते चले गए. बड़ी संख्या में गौवंश की मौत का मामला होने से कई हिंदूवादी संगठन भी नाराजगी जता रहे थे.

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वीडियो वायरल होने के बाद जागा प्रशसान 

मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में आया. जांच में सामने आया कि मृत पशुओं के निस्तारण का जिम्मा जिस ठेकेदार को दिया गया था, उसने लापरवाही बरती. तय नियमों के अनुसार शवों का सही तरीके से निस्तारण नहीं किया गया और उन्हें खुले में डाल दिया गया.जैसलमेर नगर परिषद ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की है. परिषद ने ठेकेदार का कॉन्ट्रैक्ट निरस्त कर दिया है. साथ ही भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा नहीं हो, इसके लिए सख्त निगरानी की बात कही गई है.

ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई शुरू 

नगर परिषद के आयुक्त लजपाल सिंह सोढा के मुताबिक, मामले की जानकारी मिलते ही टीम मौके पर भेजी गई थी. जांच में ठेकेदार की लापरवाही सामने आई, जिसके बाद उसका ठेका तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया गया. परिषद का कहना है कि शहर में साफ-सफाई और मृत पशुओं के निस्तारण को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

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