जयपुर में बंद की गई इंटरनेट सेवाएं सोमवार (8 जून) की रात करीब 8 बजे बहाल कर दी गईं. प्रशासन ने इंटरनेट सेवाओं को 24 घंटे के लिए बंद किया था, लेकिन तय समय से करीब चार घंटे पहले ही सभी प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों की सेवाएं शुरू कर दी गईं. इंटरनेट बहाल होने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली.

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दरअसल मालवीय नगर इलाके में 45 साल पुरानी नूरानी मस्जिद पर प्रस्तावित बुलडोजर कार्रवाई को देखते हुए प्रशासन ने एहतियात के तौर पर रात 12 बजे से इंटरनेट सेवाएं बंद करवा दी थीं. इंटरनेट बंद रहने के कारण आम लोगों को दिनभर कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा. ऑनलाइन भुगतान, डिजिटल लेनदेन, कैब बुकिंग, टिकट बुकिंग और अन्य इंटरनेट आधारित सेवाएं प्रभावित रहीं.

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इंटरनेट सेवाएं बंद होने पर कांग्रेस ने साधा निशाना

इंटरनेट सेवाएं बहाल होने के बाद कांग्रेस ने इस फैसले को लेकर सरकार और प्रशासन पर निशाना साधा. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा, "कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन इसके लिए पूरे शहर की इंटरनेट सेवाएं बंद कर देना उचित नहीं कहा जा सकता."

उन्होंने कहा, "डिजिटल युग में इंटरनेट लोगों की रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है और इसे बंद करने से लाखों लोगों के काम प्रभावित होते हैं." डोटासरा ने कहा, "सरकार को ऐसे फैसले लेने से पहले आम जनता की सुविधाओं और अधिकारों का भी ध्यान रखना चाहिए." उन्होंने सवाल उठाया कि यदि स्थिति नियंत्रण में थी तो इंटरनेट बंद करने की जरूरत क्यों पड़ी और यदि खतरा इतना बड़ा था तो सेवाएं समय से पहले कैसे बहाल कर दी गईं.

पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने भी की आलोचना

वहीं पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने भी इंटरनेट बंद करने के फैसले की कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा, "बिना किसी ठोस कारण के इंटरनेट सेवाएं बंद कर जनता को परेशान किया गया." खाचरियावास ने आरोप लगाया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से पहले किसी बड़े विरोध की स्थिति नहीं थी, इसके बावजूद फ्लैग मार्च और इंटरनेट बंदी जैसे कदम उठाए गए. 

उन्होंने कहा, "इंटरनेट बंद होने से व्यापारियों, छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा." खाचरियावास ने कहा कि जनता को हुई असुविधा के लिए बीजेपी सरकार पूरी तरह जिम्मेदार है और लोकतंत्र में इस तरह के फैसलों पर जवाबदेही तय होनी चाहिए.

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