जयपुर शहर में नई बनाई गई सड़क के उखड़ने का मामला एक बार फिर सरकारी कार्यों की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है. हैरानी की बात यह रही कि जिस सड़क को रातोंरात तैयार किया गया था, वह महज 7 से 8 घंटे बाद ही टूटने लगी.

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यह मामला सामने आते ही स्थानीय लोग भड़क गए और आरोप लगाया कि बरसों पहले बनी अच्छी सड़क पर बिना वजह नई लेयर डाल दी गई, वह भी बेहद घटिया तरीके की.

शिकायतों के बाद जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) हरकत में आया. सड़क बनने के 24 घंटे बाद मौके पर पहुंचकर पड़ताल की गई, जिसमें साफ दिखा कि सड़क कई जगहों से उखड़ चुकी है, गिट्टियां बाहर आ रही हैं और डामर ठीक से चिपका ही नहीं था. विकास प्राधिकरण ने अगले ही दिन ठेकेदार को भेजकर सड़क की मरम्मत शुरू कराई.

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मरम्मत तो हुई, लेकिन काम अधूरा

JDA ने टूटे हुए हिस्सों पर पैचवर्क तो करा दिया, लेकिन मरम्मत का स्तर भी सवालों के घेरे में है. ठेकेदार ने सिर्फ उन्हीं जगहों पर पैच डलवाए जहां गिट्टियां उखड़ी हुई थीं या जहां दरारें दिख रही थीं.

सड़क की पूरी सतह को ठीक करने के बजाय केवल छोटे-छोटे टुकड़ों में काम किया गया. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह उसी तरह का काम है जिसमें दिखाई देने वाले हिस्से भर दिए जाते हैं, लेकिन असली समस्या जस की तस बनी रहती है.

एक रात में बनी सड़क, कुछ घंटों में खराब

स्थानीय निवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि सड़क को इतनी जल्दी बनाने के चक्कर में क्वालिटी से समझौता किया गया. नई सड़क एक ही रात में बिछा दी गई थी, जबकि मानकों के अनुसार सड़क को तैयार होने में समय, परतें और तय तकनीकी प्रक्रिया की जरूरत होती है. लेकिन जल्दबाजी में किए गए निर्माण का नतीजा कुछ घंटों में ही दिख गया.

JDA की ओर से पैचवर्क कराए जाने के बाद फिलहाल सड़क चलने लायक दिख रही है, लेकिन लोगों को भरोसा नहीं है कि यह लंबे समय तक टिक पाएगी. कई लोग कह रहे हैं कि जब शुरुआत ही गलत तरीके से हुई हो, तो उसका भविष्य भगवान भरोसे ही होता है.