जयपुर में एलपीजी की किल्लत अब गंभीर रूप ले चुकी है. शहर के अलग-अलग पंपों पर सुबह से ही ऑटो और कार चालकों की लंबी कतारें लग रही हैं. हालात ऐसे हैं कि कई चालकों को सुबह 6 बजे घर से निकलना पड़ता है, तब जाकर दोपहर तक गैस मिल पाती है. लेकिन इतनी मशक्कत के बाद भी पूरी गैस नहीं मिल रही, बल्कि तय सीमा के हिसाब से ही दी जा रही है.
तय सीमा में मिल रही गैस
एलपीजी की कमी के चलते पंप संचालकों ने एक नई व्यवस्था लागू कर दी है. अब एक बार में ऑटो चालकों को सिर्फ 250 रुपये और कार चालकों को 500 रुपये तक की ही गैस दी जा रही है. चालकों का कहना है कि यह मात्रा बेहद कम है और इससे उनका रोज का काम प्रभावित हो रहा है.
इस संकट का सीधा असर शहर की ट्रांसपोर्ट व्यवस्था पर दिखने लगा है. जयपुर में करीब 38 हजार ऑटो हैं, जिनमें से लगभग 10 हजार एलपीजी से चलते हैं. गैस की कमी के कारण करीब 5 हजार ऑटो सड़कों से गायब हो गए हैं. इससे यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और उन्हें ऑटो मिलने में दिक्कत हो रही है.
ऑटो चालकों का कहना है कि 250 रुपये की गैस में वे मुश्किल से 100 से 125 किलोमीटर ही चला पा रहे हैं. ऐसे में अगर कोई लंबी दूरी की सवारी मिलती है, तो उन्हें मना करना पड़ता है.
चालकों का कहना है कि अगर वे 50 किलोमीटर दूर जाते हैं, तो वापस आने के लिए सवारी मिलेगी या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं होती. ऐसे में उन्हें दोबारा लाइन में लगकर गैस भरवानी पड़ती है.
कीमत बढ़ने से किराया भी बढ़ा
एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी और कमी, दोनों का असर आम लोगों पर पड़ रहा है. ऑटो चालकों ने बताया कि खर्च बढ़ने के कारण उन्हें किराया भी बढ़ाना पड़ा है. इससे यात्रियों की जेब पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है.
जयपुर में एलपीजी के सिर्फ 14 पंप हैं, जहां गैस की सप्लाई सीमित हो गई है. एक-एक पंप पर 3 से 4 घंटे का इंतजार आम बात हो गई है. चालकों का कहना है कि अगर जल्द ही सप्लाई सामान्य नहीं हुई, तो हालात और बिगड़ सकते हैं.
सरकार से राहत की मांग
ऑटो और कार चालकों ने सरकार से जल्द राहत देने की मांग की है. उनका कहना है कि या तो गैस की सप्लाई बढ़ाई जाए या फिर इस तय सीमा को हटाया जाए, ताकि वे बिना परेशानी अपना काम कर सकें. फिलहाल, एलपीजी संकट ने जयपुर की रफ्तार को धीमा कर दिया है और आम लोगों की जिंदगी पर सीधा असर डाल रहा है.
