राजस्थान की राजधानी जयपुर में आज (मंगलवार, 9 जून) अवैध तरीके से संचालित हो रही पटाखा फैक्ट्री में आग लगने से पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन लोग गंभीर रूप से झुलसे हुए हैं. आग की चपेट में आकर झुलसने वाले लोगों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है. झुलसे हुए तीनों लोगों की हालत नाजुक बताई जा रही है. रिहायशी बस्ती में अवैध तरीके से संचालित हो रही पटाखा फैक्ट्री ने पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं.

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यह अवैध पटाखा फैक्ट्री जयपुर शहर से तकरीबन 22 किलोमीटर दूर खा नागोरियन इलाके में पिछले काफी दिनों से संचालित हो रही थी. रिहायशी बस्ती में संचालित होने वाली यह फैक्ट्री महज 100 वर्ग गज में बने मकान में चल रही थी. सुबह करीब 11.00 बजे यहां अचानक आग लग गई. लोगों को इसकी खबर तब हुई, जब जोरदार धमाके होना शुरू हो गए. 

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40 मिनट बाद पहुंचा फायर डिपार्टमेंट

धमाके इतने जबरदस्त थे कि उसकी गूंज दूर तक सुनाई दे रही थी. चार लोग किसी तरह संकरे से रास्ते से निकलकर बाहर गली में तड़प रहे थे. बाकी लोग अंदर फंसे हुए थे. शहर से दूर होने की वजह से फायर ब्रिगेड की टीमों को पहुंचने में भी करीब 40 मिनट का वक्त लग गया. 

जानकारी मिलने के बाद कलेक्टर डॉ. संदेश नायक और एडीएम युगांतर शर्मा के साथ ही कई बड़े अधिकारी भी मौके पर पहुंचे. मामला साफ तौर पर लापरवाही का नजर आ रहा था, लिहाजा अधिकारी जांच की दुहाई देकर हर सवाल पर चुप्पी साधते नजर आए. 

विधायक अमीन कागजी ने प्रशासन को बताया जिम्मेदार

कुछ देर बाद मौके पर पहुंचे कांग्रेस के विधायक अमीन कागजी ने सरकार और प्रशासन की जमकर क्लास लगाई. उन्होंने कहा कि इन मौतों के लिए सीधे तौर पर प्रशासन जिम्मेदार है. रिहायशी बस्ती में अवैध तरीके से पटाखा फैक्ट्री संचालित हो रही थी और स्थानीय पुलिस व प्रशासन को खबर तक नहीं थी. उन्होंने पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा दिए जाने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के साथ ही अवैध पटाखा फैक्ट्री संचालित करने वाले के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की. 

अवैध पटाखा फैक्ट्री सील

जयपुर की इस घटना ने सरकारी अमले की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं. बहरहाल जिस मकान में अवैध पटाखा फैक्ट्री संचालित हो रही थी, प्रशासन ने उसे सील कर दिया है. अगर यह कदम पहले उठा लिया जाता, तो आज कई लोगों को अपनी जान ना गंवानी पड़ती. कहा जा सकता है कि सिस्टम की  लापरवाही ने पांच लोगों की जिंदगी खत्म कर दी है. 

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