राजधानी जयपुर के चांदपोल सर्किल इलाके में रविवार (8 फरवरी) को उस वक्त तनाव की स्थिति बन गई, जब दरगाह की छत के निर्माण को लेकर दो विधायकों के बीच आमना-सामना हो गया. यह मामला उस समय बढ़ा, जब हवामहल से भाजपा विधायक बालमुकुंद आचार्य अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे और निर्माण को अवैध बताते हुए विरोध शुरू कर दिया.

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भाजपा विधायक बालमुकुंद आचार्य का कहना है कि सरकारी सब्जी मंडी क्षेत्र में अतिक्रमण कर दरगाह की छत बनाई जा रही है. उनका आरोप है कि इस निर्माण से परकोटे की ऐतिहासिक दीवार को भी नुकसान पहुंचा है. उन्होंने मौके पर काम कर रहे लोगों से सवाल-जवाब किए और पूरे मामले की जांच की मांग की.

कांग्रेस विधायक भी पहुंचे मौके पर

विवाद की सूचना मिलते ही स्थानीय कांग्रेस विधायक अमीन कागजी भी मौके पर पहुंचे. उन्होंने निर्माण कार्य का खुलकर बचाव किया और कहा कि यह पूरी तरह वैधानिक है. दोनों विधायकों के बीच तीखी बहस हुई, जिससे माहौल और ज्यादा गरमा गया. स्थिति बिगड़ती देख पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को दखल देना पड़ा.

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कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर अतिरिक्त पुलिस जाप्ता तैनात किया गया. पुलिस ने एहतियातन निर्माण कार्य को फिलहाल रुकवा दिया. अधिकारियों का कहना है कि हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं और किसी तरह की अप्रिय घटना नहीं हुई है.

दस्तावेज दिखाकर वैधता का दावा

निर्माण से जुड़े लोगों ने नगर निगम की अनुमति से जुड़े कागजात सामने रखे. उनका कहना है कि विधायक निधि से 20 लाख रुपये की स्वीकृति के बाद ही वर्क ऑर्डर जारी हुआ था और सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी की गई हैं. कांग्रेस विधायक अमीन कागजी ने भी परमिशन और वर्क ऑर्डर की प्रतियां मीडिया के सामने रखीं.

स्थानीय लोगों ने दिया समर्थन

स्थानीय निवासियों और आसपास की सब्जी मंडी में काम करने वाले व्यापारियों का कहना है कि यह दरगाह दशकों पुरानी है और इलाके में आपसी सौहार्द की पहचान रही है. लोगों के मुताबिक बारिश में पानी टपकने की समस्या के चलते केवल छत का निर्माण कराया जा रहा है, न कि किसी तरह का नया विस्तार.

वहीं भाजपा विधायक बालमुकुंद आचार्य का कहना है कि जनप्रतिनिधि होने की आड़ में सरकारी जमीन पर निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो नियमों के खिलाफ है. दूसरी ओर अमीन कागजी ने आरोप लगाया कि राजनीतिक फायदे के लिए इलाके की गंगा-जमुनी तहजीब को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है.

अब गेंद प्रशासन के पाले में है. नगर निगम और पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर तय होगा कि निर्माण नियमों के अनुसार है या नहीं, और आगे क्या कार्रवाई होगी.