राजस्थान में कार्यकर्ता सुनवाई में तब्दील हो चुकी जनसुनवाई को लेकर विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. कार्यकर्ता सुनवाई में भी जिस तरह से भारी भीड़ उमड़ रही है, उसे लेकर सवाल खड़े हो रहे. सुनवाई में आए ज्यादातर कार्यकर्ताओं का कहना है कि जिलों में अधिकारी कुछ भी सुनने को तैयार नहीं है, लिहाजा उन्हें सैकड़ो किलोमीटर का सफर तय कर जयपुर आना पड़ रहा है.

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भीड़ और अव्यवस्था को लेकर विपक्ष सरकार और बीजेपी पर निशाना साध रहा है. कहा जा रहा है कि जब अधिकारी सरकार के मंत्रियों सांसदों और विधायकों की बात नहीं सुनते हैं तो मंत्रियों की इस सुनवाई का क्या फायदा है. इससे न तो कार्यकर्ताओं का काम होना है और ना ही जनता का काम होना है.

सरकार के निर्देश शुरू हुई कार्यकर्ता सुनवाई

गौरतलब है कि राजस्थान सरकार ने एक दिसंबर से राजधानी जयपुर में बीजेपी दफ्तर में जनसुनवाई किए जाने का ऐलान किया था. दो दिन में ही जनसुनवाई को कार्यकर्ता सुनवाई का नाम दे दिया गया. बीजेपी के बड़े पदाधिकारी व जनप्रतिनिधियों की सिफारिशी चिट्ठी वाले कार्यकर्ताओं को ही एंट्री दी जा रही है.

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हफ्ते में तीन दिन होने वाली इस सुनवाई में अब कार्यकर्ताओं की भी भारी भीड़ उमड़ रही है. भरतपुर से लेकर जोधपुर और जैसलमेर से गंगानगर तक के कार्यकर्ता अपने व दूसरों के काम लेकर आ रहे हैं. कार्यकर्ताओं की खुद की इतनी समस्या है कि वह अपने काम कराने के लिए परेशान दिखाई देते हैं. कार्यकर्ता सुनवाई में सोमवार से बुधवार तक रोजाना दो मंत्रियों को दो घंटे तक सुनवाई करनी है.

बीजेपी कार्यकर्ताओं का आरोप- अधिकारी नहीं करते हैं काम

हालांकि, कार्यकर्ताओं की भीड़ इतनी ज्यादा उमड़ रही है कि कई मंत्रियों को शाम तक बैठना पड़ रहा है. बीजेपी की स्थापना के समय से ही पार्टी से जुड़े स्वतंत्रता संग्राम सेनानी 95 साल के बुजुर्ग भी यहां भीड़ में धक्के खाते हुए दिखाई देते हैं. यहां आने वाले ज्यादातर कार्यकर्ताओं का कहना है कि अधिकारी कतई काम करने और सुनने को तैयार नहीं है. अगर नीचे के लेवल पर सुनवाई शुरू हो जाए तो उन्हें यहां आकर भीड़ का हिस्सा बनने की जरूरत ना पड़े. 

इस बारे में डिप्टी सीएम दिया कुमारी का कहना है कि कार्यकर्ताओं को सम्मान देने के लिए यह कार्यक्रम शुरू किया गया है. समस्याओं को दूर कराने की कोशिश की जा रही है. उनके मुताबिक आम जनता तो कभी भी मंत्रियों के घर और दफ्तर जाकर उनसे अपना काम करा लेती है. राज्य के कैबिनेट मंत्री झाबर सिंह खर्रा का कहना है कि भीड़ इसलिए उमड़ रही है क्योंकि लोगों के काम हो रहे हैं. कांग्रेस के आरोप गलत हैं कि मंत्रियों की सुनवाई नहीं होती.

कांग्रेस ने बीजेपी और सरकार पर साधा निशाना

दूसरी तरफ इस जनसुनवाई को लेकर कांग्रेस पार्टी ने सरकार और बीजेपी पर निशाना साधा है. कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का कहना है कि इस सुनवाई से कुछ भी होने वाला नहीं है. कार्यकर्ताओं में जबरदस्त नाराजगी है और उनकी नाराजगी को कम करने के लिए सुनवाई का ड्रामा किया जा रहा है.

कार्यकर्ताओं से एप्लीकेशन तो ले लिए जा रहे हैं लेकिन उनका कोई काम नहीं हो रहा है. कार्यकर्ताओं को सम्मान के साथ बुलाया जाना चाहिए था. उन्हें भीड़ में धक्के नहीं खिलाना चाहिए. प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का कहना है कि जिस सरकार में कार्यकर्ताओं का यह हाल है वहां जनता कितनी परेशान होगी इसका अंदाजा लगाया जा सकता है.