भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर के एलान पर अजमेर शरीफ दरगाह के दीवान सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंन कहा कि भारत हमेशा से शांतिप्रिय देश रहा है. भारत ने कभी भी युद्ध में या संघर्ष में विश्वास नहीं रखा है. लेकिन जहां देशवासियों की आन, बान और शान की बात आती है, देश की सुरक्षा की बात आती है तो भारत पीछे भी नहीं हटता है. उन्होंने कहा कि इसका जीता जागता सबूत यही है कि पहलगाम हमले के बाद पूरे देश में जो रोष था, पूरी देश की भावनाएं जो आहत हुई थीं, भारत सरकार ने उसको समझा था. देश के प्रधानमंत्री ने उसको समझा था और पाकिस्तान को उसी की भाषा में करारा जवाब दिया गया.

'भारत को जिम्मेदारियों का अहसास है'

इसके आगे उन्होंने कहा, "इससे पूरे देशवासियों को सुकून हुआ. ऑपरेशन सिंदूर, जो हमारी मां-बहनों के सिंदूर को उजाड़ा गया था उसका जवाब भारत सरकार ने बखूबी दिया था. भारत शुरू से ही शांतिप्रिय देश रहा है. भारत को अपनी जिम्मेदारियों का एहसास है कि इतना सबकुछ होने के बाद भी भारत के द्वारा अभी तक जितने भी हमले वहां पर किए गए हैं, ये मिसाइल भेजी गई हैं वो किसी नागरिक को चोट नहीं पहुंचाएगा. सिर्फ आतंकवादी कैंप जो वहां पर थे, उन्हीं को टारगेट किया गया."

'भारत की सरकार ने सोच समझकर फैसला लिया होगा'

सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने ये भी कहा कि भारत का स्टैंड बहुत क्लियर है. उन्होंने कहा कि भारत की सरकार और भारतीय सेना ने सोच समझकर ही फैसला लिया होगा. उन्होंने आगे कहा, "लेकिन मेरा मानना यही है कि पाकिस्तान की हुकूमत पर विश्वास नहीं किया जा सकता. वहां की सेनाओं पर विश्वास नहीं किया जा सकता. उनके नापाक इरादे उनके दिलों में घर कर चुके हैं. वो कभी भी कुछ भी कर सकते हैं. देश को तो यही उम्मीद थी कि इस बार आर-पार की लड़ाई होगी और पीओके वापस देश में सम्मलित किया जाएगा."

'पाकिस्तान को घुटने पर बैठाया'

अजमेर शरीफ के दीवान ने इसके साथ ही कहा, "खैर ऊपरवाले को मंजूर होता है तभी ऐसे काम होते हैं. भारत सरकार का मैं धन्यवाद करूंगा कि उन्होंने देश की भावनाओं को समझा और पाकिस्तान को घुटने पर बैठाया. पिछले तीन दिनों से ये देखने में आ रहा था कि पाकिस्तान भीख मांग रहा था. पैसों के लिए भी और लोगों के दरवाजे पर वहां की हुकूमत खड़ी थी कि हिंदुस्तान से हमारा समझौता कराओ, हिंदुस्तान को हमारे से हमले करने से रोको. तो शायद कुछ बड़े मुल्कों ने उनकी इस पुकार को, उनकी इस बेबसी को सुन लिया होगा...हम सरकार के हर फैसले और सेना के हर फैसले के साथ खड़े हैं. लेकिन हमें सतर्क रहना चाहिए."