जयपुर में सनातन संस्कृति के संरक्षक - पुजारी आर्थिक, प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से जूझ रहे है. अनेक अराजकीय और भूमिहीन मंदिरों में कार्यरत पुजारी तो भगवान की नित्य पूजा-अर्चना की सामग्री की व्यवस्था तक के लिए संघर्ष कर रहे हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक संकट गहराने से इनकी स्थिति और भी दयनीय हो चुकी है.
यह चर्चा गुरुवार (18 सितंबर) से प्रदेश के खाटू श्याम जी के मंदिर में पुजारी सेवक महासंघ के पदाधिकारियों ने की. यहां दो दिवसीय महाधिवेशन की शुरुआत हुई. इससे पहले बुधवार (17 सितंबर) ) को स्टेशन रोड स्थित नारायण धाम में पुजारी सेवक महासंघ के पदाधिकारियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. जिसमे महाधिवेशन की जानकारी दी.
अन्य राज्यों से भी फनारी प्रतिनिधि भाग लें रहें हैं
गुरुवार (18 सितंबर) से खाटूश्यामजी स्थित जयपुर वालों की धर्मशाला में दो दिवसीय दूसरा प्रांतीय महाधिवेशन शुरू हुआ. इसमें राजस्थान के लगभग पांच हजार पुजारियों के अतिरिक्त मध्य प्रदेश, गुजरात सहित अन्य राज्यों से भी फनारी प्रतिनिधि भाग लें रहें हैं.
खाटूश्यामजी मंदिर के महंत मोहनदास ने बताया कि, महाधिवेशन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी मंदिरों में कार्यरत सेवायत एवं पुजारियों की गंभीर समस्याओं पर विचार-विमर्श करना और उनके निस्तारण के लिए ठोस कदम सुझाना है. उन्होंने कहा कि पुजारी का जीवन बेहद कठिन है. उनकी मदद के लिए सरकार के सामने कई मांग भी की जाएगी.
पुजारी सेवक महासंघ की प्रमुख मांगें:
- अराजकीय भूमिहीन मंदिरों के पुजारियों को 30 हजार प्रतिमाह.
- प्रोटेक्शन बिल.
- ग्रामीण मंदिरों के पट्टे पुजारियों को.
- निशुल्क बिजली-पानी.
- मंदिर संपत्ति विवादों के लिए ट्रिब्यूनल.
- पुजारी कल्याण कोष का गठन.
- कल्याण बोर्ड का पुनर्गठन .
- भोग राशि न्यूनतम 10 हजार.
- कृषि योजनाओं में समान लाभ.
- मंदिर माफी भूमि का गैर-कृषि उपयोग.
सनातन धर्म के पुजारी आज कई मुश्किलों में हैं. वे पैसे, इंतजाम और सुरक्षा को लेकर परेशान हैं. खास तौर पर गांवों के छोटे मंदिरों के पुजारी पूजा-पाठ के लिए भी पैसे की तंगी झेल रहे हैं. इन समस्याओं के लिए राजस्थान और अन्य राज्यों के 5000 पुजारी खाटू श्याम जी में इकट्ठा होंगे. यह बड़ी बैठक पुजारियों की मांगों को सरकार तक पहुंचाएगी. वे इंतजाम में सुधार, सुरक्षा, जमीन के हक और आर्थिक मदद जैसे मुद्दों पर बात करेंगे.