राजस्थान डूंगरपुर के जंगलों से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर आ रही है. वन्यजीव प्रेमियों के लिए जहाँ एक ओर पैंथर्स के कुनबे से जुड़ी खुशखबरी है, वहीं राष्ट्रीय पक्षी मोर को लेकर एक बेहद चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है.
डूंगरपुर के जंगलों में इस बार वैशाख पूर्णिमा की दूधिया चांदनी सिर्फ खूबसूरती के लिए नहीं, बल्कि एक बड़े मिशन के लिए थी. वन विभाग ने जिले के 42 प्रमुख 'वाटर होल्स' पर 24 घंटे की कड़ी निगरानी रखकर वार्षिक वन्यजीव गणना का कार्य संपन्न किया. मचानों पर बैठकर अधिकारियों ने गर्मी के कारण पानी पीने आने वाले हर जीव का हिसाब रखा.
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गणना के नतीजे मिश्रित रहे
इस गणना के नतीजे चौंकाने वाले और मिश्रित रहे. डूंगरपुर के लिए सबसे सुखद खबर यह है कि यहां पैंथर और लोमड़ी की संख्या में इजाफा दर्ज किया गया है. विशेषज्ञों की मानें तो पैंथर्स की बढ़ती संख्या इस बात का प्रमाण है कि जंगल में शिकार का आधार (Prey Base) मजबूत हो रहा है.
मोर की संख्या में गिरावट से बढ़ी चिंता
लेकिन, इसी रिपोर्ट का दूसरा पहलू डराने वाला है. डूंगरपुर की पहचान माने जाने वाले मोर, शातिर सियार और जरख की संख्या में इस साल भारी गिरावट देखी गई है. खासकर राष्ट्रीय पक्षी मोर की कम होती तादाद ने पर्यावरणविदों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं. इसके साथ ही, कुछ वाटर होल्स पर दुर्लभ मगरमच्छों की मौजूदगी ने जैव विविधता का एक नया अध्याय खोला है.
वैज्ञानिक पद्धति से डेटा जुटाया गया
मोहित गुप्ता DFO, डूंगरपुर का कहना है की हमने इस बार वैज्ञानिक पद्धति और वैशाख पूर्णिमा की लाइट का उपयोग करते हुए डेटा जुटाया है. पैंथर्स का बढ़ना शुभ संकेत है, लेकिन मोर और अन्य जीवों की कमी हमारे लिए चिंता का विषय है. अब इन आंकड़ों के आधार पर हम वन्यजीव प्रबंधन और जल संरक्षण की नई और ठोस रूपरेखा तैयार करेंगे ताकि प्राकृतिक संतुलन बना रहे.
डूंगरपुर वन विभाग अब इन आंकड़ों को आधार बनाकर भविष्य की रणनीति तैयार कर रहा है. देखना होगा कि आने वाले समय में घटते जीवों की संख्या को रोकने के लिए विभाग क्या कड़े कदम उठाता है.
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