राजस्थान में एक बार फिर गौरक्षकों का गुस्सा एक बार फिर देखने को मिला, जब कोटा के हैंगिंग ब्रिज पर गोरक्षा से जुड़े संगठनों और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के काफिले को रोककर विरोध दर्ज कराया. ये घटनाक्रम 28 दिसंबर को हुआ. 

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गोरक्षक नगर निगम क्षेत्र में मृत गोवंश के निस्तारण को लेकर पिछले दो हफ्ते से आंदोलन कर रहे हैं. इसी कड़ी में वे रविवार (28 दिसंबर) को पदयात्रा के जरिए अपना विरोध जता रहे थे. हैंगिंग ब्रिज पर पदयात्रा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का काफिला वहां से गुजर रहा था, जिस पर कार्यकर्ताओं ने उसे रोक लिया और अपनी नाराजगी जताते हुए प्रशासन के रवैये की शिकायत की.

गोवंश को सड़कों पर घसीटकर ले जाने का मामला

आरोप लगाया गया कि नगर निगम से जुड़े ठेकेदार मृत गायों को नियमों के विपरीत खुले मैदानों और खाली भूखंडों में डाल रहे हैं. कई स्थानों पर गोवंश को सड़कों पर घसीटकर ले जाने के मामले भी सामने आए हैं. जिसे वे न सिर्फ अमानवीय बल्कि धार्मिक आस्थाओं का अपमान मानते हैं. गोवंशों के साथ इस तरह के व्यवहार से क्षेत्र में दुर्गंध और संक्रमण का खतरा भी बढ़ रहा है.

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मैं खुद सनातनी हूं, अफसर सुस्त है- वसुंधरा राजे

गोरक्षकों के बीच घिरने के बाद पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने कहा है कि वे खुद सनातनी हैं. गौमाता के संरक्षण में अधिकारियों की लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने कहा कि गोरक्षक प्रदर्शन कर रहे हैं और अधिकारी सुन नहीं रहे. जनता चुस्त है, अफसर सुस्त है. अजीब बात है कि 14 दिसंबर से लोग आवाज उठा रहे हैं, लेकिन अफसर हैं कि उनकी सुन ही नहीं रहे. ऐसा कतई नहीं चलेगा.

पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने कोटा रेंज के डीआईजी राजेंद्र गोयल व एसपी तेजस्विनी गौतम को मौके पर बुलाया और उन्हें इस मामले की गहनता से जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए. दोनों पुलिस अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि दोषियों को दंड मिलेगा और गौमाता का अंतिम संस्कार मिट्टी डालकर विधिपूर्वक किया जाएगा. बहरहाल करीब आधे घंटे बाद ही वसुंधरा राजे वहां से जा सकीं.