साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 46 मिनट तक रहेगा. यह ग्रहण भारत के कई हिस्सों में दिखाई दे रहा है, इसलिए इसका सूतक काल मान्य होगा. सूतक काल सुबह 6 बजकर 20 मिनट से शुरू होते ही जयपुर समेत राजस्थान के कई मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए हैं.

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सूतक लगते ही मंदिरों में बदली व्यवस्था

सूतक काल शुरू होते ही शहर के बड़े और प्रसिद्ध खोले के हनुमान जी मंदिर के कपाट भी बंद कर दिए गए. सुबह 6 बजकर 22 मिनट पर मंदिर प्रशासन ने विधिवत पूजा-अर्चना के बाद गर्भगृह के द्वार बंद किए. इसके साथ ही श्रद्धालुओं के नियमित दर्शन पर अस्थायी रोक लगा दी गई.

मंदिर परिसर में दिनभर धार्मिक वातावरण बना हुआ है. गर्भगृह पर पर्दे डाल दिए गए हैं या फिर कपाट पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं. हालांकि बाहर श्रद्धालु भजन-कीर्तन और मंत्र जाप करते नजर आ रहे हैं.

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शहर के अन्य मंदिरों पर भी असर

जयपुर शहर के ज्यादातर प्रमुख मंदिरों के कपाट बंद किए गए. सूतक काल में दर्शन और स्पर्श पूजा पर रोक लगाई गई. गर्भगृह को पूरी तरह आच्छादित किया गया. साधक और श्रद्धालु मंदिर परिसर के बाहर जाप और साधना कर रहे हैं. सूतक के कारण आम भक्त मंदिर के भीतर जाकर दर्शन नहीं कर पा रहे हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रहण के दौरान मूर्तियों को स्पर्श नहीं किया जाता और पूजा विधि सीमित रूप में की जाती है.

सूतक समाप्ति के बाद फिर खुलेंगे कपाट

मंदिर प्रशासन के अनुसार ग्रहण समाप्ति के बाद शुद्धिकरण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. इसके बाद मंदिर के कपाट दोबारा श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे. पुजारी सुरेश कुमार सैनी ने बताया कि ग्रहण काल में विशेष सावधानियां बरती जा रही हैं और परंपराओं का पालन किया जा रहा है. यानी चंद्र ग्रहण के समापन के साथ ही सूतक काल खत्म हो जाएगा.

उन्होंने कहा कि भले ही कपाट बंद हैं, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था और भक्ति में कोई कमी नहीं आई है. ग्रहण समाप्त होने के बाद विधि-विधान से पूजा कर मंदिर को पुनः नियमित दर्शन के लिए खोला जाएगा.