बाड़मेर में निजी स्कूलों की मनमानी और स्कूली बच्चों को बसों में ठूसकर भरने की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं. हालात कितने खराब हैं, यह जानने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (CJM) कृष्णा गुप्ता खुद सड़क पर उतर आईं. बुधवार (3 दिसंबर) सुबह उन्होंने शहर की कई स्कूल बसों और वैन को रोककर औचक निरीक्षण किया. हालात देखकर वे हैरान भी हुईं और नाराज भी.

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निरीक्षण के दौरान कई बसों में क्षमता से दोगुने बच्चे बैठे मिले. कहीं एक्स्ट्रा सीट लगाई गई थी, तो कहीं बच्चों को खड़े-खड़े सफर कराया जा रहा था. इस स्थिति को देखकर CJM कृष्णा गुप्ता ने कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि बच्चों को जानवरों से भी बदतर हालत में भरा गया है.

उन्होंने मौके पर मौजूद स्कूल स्टाफ से सवाल पूछे, लेकिन स्कूल प्रशासन जानकारी छुपाता हुआ नजर आया. पहले 4 बसें बताई गईं, फिर 6 लेकिन जांच में इससे ज्यादा वाहन स्कूल के नाम पर मिले.

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डेजी डेज इंटरनेशनल स्कूल की पकड़ी गई बसें

निरीक्षण की शुरुआत डेजी डेज इंटरनेशनल स्कूल की बसों से हुई, जहां बच्चों को ठूस-ठूसकर बैठाया गया था. बसों के भीतर अतिरिक्त सीटें लगाई गई थीं और सुरक्षा मानकों की खुली धज्जियां उड़ाई जा रही थीं. स्थिति को देखते हुए CJM ने मौके पर परिवहन विभाग और पुलिस को तुरंत बुलाया और सभी बसों व वैन को सीज करने के आदेश दिए.

स्कूल प्रशासन पर गुमराह करने का आरोप

CJM कृष्णा गुप्ता ने बताया कि स्कूल प्रशासन ने जांच टीम को भटकाने की कोशिश भी की. दिए गए आंकड़े गलत थे और वाहनों की वास्तविक संख्या छुपाई जा रही थी. लेकिन मौके पर मिली बसों की हालत और संख्या कुछ और ही कहानी कह रही थी. उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि ऐसी लापरवाही पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और नियमित चेकिंग भी जारी रहे.

निरीक्षण के बाद जज कृष्णा गुप्ता ने अभिभावकों से भी अपील की कि थोड़े पैसे बचाने के चक्कर में बच्चों को खतरनाक और ओवरलोडेड वाहनों में स्कूल न भेजें. बच्चे सबसे कीमती हैं, उनकी सुरक्षा में समझौता न करें.

उन्होंने कहा कि ओवरलोडिंग हादसे की सबसे बड़ी वजह है, और ऐसी लापरवाही किसी बड़े दुर्घटना का कारण बन सकती है.

पूरे राजस्थान में चल रहा है अभियान

राजस्थान विधिक सेवा आयोग के निर्देश पर इन दिनों पूरे प्रदेश में स्कूल वाहनों का सघन निरीक्षण अभियान चल रहा है. इसमें जज खुद औचक निरीक्षण कर रहे हैं ताकि स्कूल बसों और वैन में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.