राजस्थान की जेलों की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर से गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल के भीतर चंबल के कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की नृशंस हत्या कर दी गई है. इस बड़ी घटना के बाद जेल प्रशासन से लेकर राज्य सरकार तक में हड़कंप मचा हुआ है.

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बताया गया है कि राज्य की जेलों में सिर्फ हत्याएं ही नहीं की जा रही हैं, बल्कि बंदियों की तरफ से लगातार मारपीट, पार्टियां करने, सोशल मीडिया के लिए रील बनाने और मोबाइल फोन का धड़ल्ले से इस्तेमाल किए जाने के मामले भी सामने आ रहे हैं. इस हत्याकांड के बाद विपक्ष की ओर से सरकार पर तीखे हमले किए जा रहे हैं, जिसका जवाब देते हुए सरकार को फिलहाल काफी असहज देखा जा रहा है.

न्यायिक जांच के दिए गए आदेश, सुरक्षा होगी और सख्त

इस पूरे बवाल पर राजस्थान के गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेडम की तरफ से सरकार का पक्ष स्पष्ट किया गया है. उनके बयान में कहा गया है कि जेलों की सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही काफी पुख्ता रखी गई है और सरकार सुरक्षा को लेकर पूरी तरह से सजग है.

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हालांकि, अजमेर जेल में हुई इस वारदात के बाद सुरक्षा ढांचे की फिर से गहन समीक्षा की जा रही है और इसे और मजबूत बनाए जाने के लिए हर संभव व सख्त कदम उठाए जा रहे हैं. मंत्री की ओर से स्पष्ट किया गया है कि डकैत जगन गुर्जर की हत्या के मामले की न्यायिक जांच कराई जा रही है. जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही उचित और कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

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'अपराधियों में नहीं रह गया है खौफ, दावे हुए फेल'

दूसरी तरफ, इस हत्याकांड को लेकर विपक्ष की ओर से सत्ता पक्ष पर जमकर निशाना साधा गया है. राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की तरफ से जेलों में लगातार हो रही ऐसी घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है. उनके बयान से आरोप लगाया गया है कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो चुकी है और अपराधियों में पुलिस या प्रशासन का कोई खौफ नहीं रह गया है.

पूर्व सीएम की ओर से यह भी कहा गया है कि अपराध सिर्फ जेल की चारदीवारी के भीतर ही नहीं किए जा रहे हैं, बल्कि बेखौफ अपराधियों की तरफ से खुलेआम बाहर भी संगीन वारदातों को अंजाम दिया जा रहा है. उनके अनुसार, सुरक्षा को लेकर सरकार की ओर से किए जा रहे सभी दावे जमीनी स्तर पर पूरी तरह से फेल साबित हो रहे हैं. सरकार से मांग की गई है कि इस बिगड़ती स्थिति को सुधारने के लिए तुरंत जरूरी और कड़े कदम उठाए जाएं.

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