जगतार सिंह हवारा की परोल को लेकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पंजाब इकाई में दो फाड़ नजर आ रहा है. एक ओर जहां कांग्रेस के कुछ विधायकों ने आम आदमी पार्टी की सरकार के फैसले का समर्थन किया है तो वहीं राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने मुख्यमंत्री भगवतं सिंह मान पर सवाल उठाए हैं. 

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अपने X हैंडल पर उन्होंने लिखा - कि क्या बब्बर खालसा के सदस्य व पूर्व मुख्यमंत्री सरदार बेअंत सिंह की हत्या की सजा भुगत रहे व्यक्ति को छुड़वाने (छुट्टी दिलाने) के अलावा और भी कोई काम है? ये बातें पंजाब की अमन शांति के लिए घातक हैं .

इससे पहले मान सरकार के इस कदम का कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा और परगट सिंह दोनों ने ही स्वागत किया है.  परगट सिंह ने कहा है कि यह मुख्यमंत्री का अच्छा कदम है क्योंकि जगतार सिंह हवारा की मां की तबियत ठीक नहीं है और मानवीय आधार पर उन्हें पैरोल दी जानी चाहिए. 

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मान ने की राज्यपाल से मुलाकात

बता दें पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाक़ात की और उनसे गृह मंत्रालय से जगतार सिंह हवारा को 10 दिन की पैरोल देने की सिफारिश करने का आग्रह किया, ताकि वह अपनी मां से मिल सके. साथ ही, मुख्यमंत्री मान ने कहा कि उन्होंने राज्यपाल को राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने का भरोसा दिलाया और कहा कि मानवीय आधार पर हवारा को अपनी मां से मिलने की इजाजत दी जानी चाहिए.

शिरोमणि अकाली दल ने भी जगतार सिंह हवारा को मानवीय आधार पर पैरोल देने की वकालत की है. भारतीय जनता पार्टी ने भी जगतार हवारा को पैरोल दिए जाने का विरोध नहीं किया है. हालांकि पार्टी के विधायक और पूर्व पंजाब अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने मुख्यमंत्री द्वारा पैरोल की सिफारिश की चिट्ठी लिखे जाने के वक्त पर सवाल उठाया है और कहा है कि आज ही क्यों भगवंत मान को इसका ध्यान आया है.