पंजाब के पटियाला जिले में लगातार भारी बारिश के बाद घग्गर नदी और आसपास के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है. स्थानीय लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी करते हुए ग्रामीणों को सतर्क रहने और नदी के पास जाने से बचने की सलाह दी है.

राजपुरा के उप-मंडल मजिस्ट्रेट अविकेश गुप्ता ने बताया कि ऊंटसर, नन्हेड़ी, संजरपुर, लाछड़, कमालपुर, रामपुर, सौंटा, माड़ और चमारू गांवों के निवासियों को सतर्क रहने की हिदायत दी गई है. किसी भी आपात स्थिति में लोग राजपुरा बाढ़ नियंत्रण कक्ष से संपर्क कर सकते हैं.

1988 के बाद बाढ़ का फिर सामना कर रहा पंजाब

पंजाब इस समय 1988 के बाद की सबसे भीषण बाढ़ का सामना कर रहा है. सतलुज, ब्यास और रावी जैसी प्रमुख नदियों के साथ-साथ कई छोटी नदियां भी उफान पर हैं. हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार हुई भारी बारिश के कारण जलस्तर तेजी से बढ़ा है, जिससे फसलें और गांव जलमग्न हो रहे हैं.

प्रशासन ने लोगों को अलर्ट रहने के दिए निर्देश

प्रशासन के अनुसार प्रदेश के पठानकोट, गुरदासपुर, फाजिल्का, कपूरथला, तरनतारन, फिरोजपुर, होशियारपुर और अमृतसर जिलों में बाढ़ का असर सबसे ज्यादा है. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने जिला अधिकारियों को राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं.

पटियाला के दूधन साधा क्षेत्र के उप-मंडल मजिस्ट्रेट कृपालवीर सिंह ने भसमड़ा, जलाहखेड़ी और राजू खेड़ी गांवों के निवासियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं. वहीं उप-मंडल मजिस्ट्रेट हरजोत कौर मावी ने हडाणा, पुर और सिरकप्पड़ा गांवों के लिए भी परामर्श जारी किया है.

प्रशासन ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर

जिला प्रशासन ने कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिया है और हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं. अधिकारियों ने निवासियों से अपील की है कि वे अफवाहों से दूर रहें और जलस्तर में किसी भी वृद्धि की सूचना तुरंत दें.

पटियाला में पहले भी दो बार मच चुकी है तबाही

इतिहास पर नजर डालें तो पटियाला ने 1993 में भीषण बाढ़ देखी थी, जब राजपुरा और समाना के बड़े हिस्से जलमग्न हो गए थे और हजारों लोग विस्थापित हुए थे. 2023 में भी भारी मानसूनी बारिश के कारण कई गांवों में पानी भर गया था और फसलों व घरों को भारी नुकसान हुआ था.

अधिकारियों का कहना है कि इस बार बाढ़ नियंत्रण प्रणाली पहले से मजबूत है, लेकिन समय पर सतर्कता और सावधानी बरतना ही जान-माल के नुकसान से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है.