पंजाब में आई बाढ़ ने लोगों की जिंदगी अस्त-व्यस्त कर दी है. खेत-खलिहान डूब गए, घरों में पानी घुस गया और लोग अपने ही गांव से दूर राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं. इस मुश्किल हालात का जायजा लेने खुद पंजाब के मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा रविवार को अमृतसर, पठानकोट और कपूरथला के बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचे.

उन्होंने कहा कि इस संकट की घड़ी में पंजाब सरकार मजबूती से जनता के साथ खड़ी है और हर तरह के नुकसान का मुआवजा दिया जाएगा.

हालात सामान्य होते ही होगा विशेष सर्वे

मुख्य सचिव सिन्हा ने भरोसा दिलाया कि जैसे ही हालात काबू में आएंगे, सरकार एक विशेष सर्वे करवाएगी. इसके जरिए यह पता लगाया जाएगा कि किसको कितने नुकसान का सामना करना पड़ा है और फिर उसी के मुताबिक मुआवजा दिया जाएगा.

उन्होंने कहा कि इस वक्त सबसे अहम काम राहत और बचाव का है, ताकि लोगों की जान और माल सुरक्षित रहे.

राहत और बचाव में जुटा पूरा प्रशासन

सिन्हा ने बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बना दी है. इसके तहत अमृतसर जिले में तीन वरिष्ठ अधिकारियों को लगाया गया है, जो लगातार राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं.

उन्होंने सेना, एनडीआरएफ, पुलिस और सिविल प्रशासन के प्रयासों की तारीफ करते हुए कहा कि हर कोई पूरी ताकत से बाढ़ पीड़ितों की मदद में जुटा हुआ है.

अमृतसर-पठानकोट का दौरा

मुख्य सचिव ने अमृतसर जिले के अजनाला और रामदास के गांवों का दौरा किया. साथ ही पठानकोट जिले के बमियाल और नरोत जैमल सिंह ब्लॉक्स में जाकर रावी नदी के धुस्सी तटबंध की हालत देखी. यहां पानी ज्यादा छोड़ने से तटबंध को नुकसान पहुंचा है, जिससे कई गांव प्रभावित हुए. हालांकि अब पानी का स्तर धीरे-धीरे घटने लगा है.

उन्होंने चामियारी गांव के राहत केंद्र का भी दौरा किया और वहां की व्यवस्थाओं की समीक्षा की. गांववालों से सीधे बातचीत कर उनकी परेशानियां सुनीं.

कपूरथला में लोगों से सीधा संवाद

कपूरथला जिले के सुल्तानपुर लोधी में सिन्हा ने बाढ़ राहत कार्यों की समीक्षा की. बाउपुर और संगरा गांव के लोगों से बातचीत के दौरान उन्होंने भरोसा दिलाया कि “सरकार स्थायी समाधान खोजने की कोशिश कर रही है, ताकि भविष्य में इन 16 गांवों को बाढ़ से बचाया जा सके.”

उन्होंने कहा कि इस वक्त प्राथमिकता लोगों की निकासी, सुरक्षित आश्रय, भोजन और दवाइयों की व्यवस्था है. साथ ही पशुधन के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा जा रहा है.

इस मौके पर राज्यसभा सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल भी मौजूद रहे. उन्होंने बाउपुर पुल से नाव में बैठकर सीधे बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और उनकी तकलीफें सुनीं.

फिरोजपुर और फाजिल्का में भी राहत कार्य

उधर, अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग वर्मा ने फिरोजपुर और फाजिल्का जिलों का दौरा किया. उन्होंने बताया कि पंजाब में इस बार की बाढ़ से लगभग तीन लाख एकड़ जमीन प्रभावित हुई है और करीब 1.25 लाख लोग इसकी चपेट में आए हैं.

सिर्फ फिरोजपुर जिले की ही बात करें तो यहां 107 गांव और करीब 45,000 लोग प्रभावित हुए हैं. विस्थापित परिवारों के लिए जिला प्रशासन ने 8 राहत शिविर लगाए हैं, जहां उन्हें भोजन और जरूरी सामान दिया जा रहा है.

गांव गट्टी राजोके में धीमी निकासी की शिकायत

वर्मा ने गांव गट्टी राजोके का भी दौरा किया. यहां ग्रामीणों ने शिकायत की कि बाढ़ का पानी धीरे-धीरे निकल रहा है. इस पर उन्होंने निकासी विभाग को तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए.

साथ ही उन्होंने कहा कि कई गांवों का संपर्क टूटा हुआ है, क्योंकि सड़कों पर पानी भरा है. प्रशासन को सड़क बहाली का काम तेज करने को कहा गया है.

मुख्य सचिव ने साफ कहा कि अधिकारियों और कर्मचारियों को राहत कार्यों को केवल सरकारी ड्यूटी न मानकर जनसेवा की तरह करना चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा कि इस मुश्किल घड़ी में प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता जान बचाना और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है.