भारतीय इतिहास में 14 फरवरी 2019 का दिन एक काले दिवस के तौर पर दर्ज है. इसी दिन एक बेहद दुखद घटना घटी थी, जिसमें पुलवामा जिले में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी ने विस्फोटकों से भरे वाहन से सीआरपीएफ जवानों की बस को टक्कर मार दी. इस आत्मघाती हमले में 40 जवान शहीद हुए और कई गंभीर रूप से घायल हो गए. इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया और तब से यह दिन ब्लैक डे के रूप में दर्ज हो गया.
परिवारों का दर्द आज भी जिंदा
पंजाब के मोगा निवासी शहीद जयमल सिंह के परिवार ने उस काले दिन को याद किया. पिता ने बताया कि उनके नाम पर सड़क बनाई जा रही है, जो गर्व और पीड़ा दोनों का एहसास कराती है. मां ने कहा कि एक मां के लिए बेटे का जाना जीवन को थमा देता है और यह दर्द कभी खत्म नहीं होता.
पत्नी ने भावुक होकर कहा कि उनके बिना जीवन बेहद कठिन है, लेकिन बेटे की परवरिश के लिए खुद को संभालना पड़ता है. उन्होंने बताया कि उनका बेटा अब बड़ा हो गया है और पढ़ाई पर ध्यान दे रहा है. वह अपने पिता को याद करता है, पर समझता है कि जो हुआ उसे बदला नहीं जा सकता.
भारत की जवाबी कार्रवाई
हमले के कुछ दिनों बाद भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट में एयरस्ट्राइक की, जिसे बालाकोट एयरस्ट्राइक के नाम से जाना गया. इस कार्रवाई के जरिए आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया और यह संदेश दिया गया कि देश अपने जवानों की शहादत व्यर्थ नहीं जाने देगा. पुलवामा हमला आज भी देश की स्मृति में जिंदा है. सात साल बाद भी शहीदों के परिवारों का दर्द और देश की आंखों की नमी उस दिन की याद दिलाती है. यह काला दिवस देश को आतंकवाद के खिलाफ एकजुट रहने की सीख देता है.
क्या हुआ और कैसे हुआ हमला?
आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े हमलावर ने श्रीनगर-जम्मू हाईवे पर सीआरपीएफ के काफिले को निशाना बनाया. विस्फोट इतना भीषण था कि बस के परखच्चे उड़ गए और आसपास का इलाका दहल उठा. देशभर में शोक और आक्रोश की लहर दौड़ गई.
