पंजाब के मोगा जिले के सदर थाना परिसर में 8 जुलाई को हुए ग्रेनेड हमले की जांच में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है. मोगा पुलिस का दावा है कि उसने इस मामले में एक बड़ी आतंकी साजिश को समय रहते नाकाम कर दिया. जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने जम्मू-तवी एक्सप्रेस को उड़ाने की भी योजना बनाई थी. पुलिस ने अब तक इस मामले में 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके कब्जे से आईईडी (IED), विस्फोटक सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक डेटोनेटर और मैगजीन सहित 9 एमएम ग्लॉक पिस्तौल बरामद की है.

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आईजी फरीदकोट रेंज नीलांबरी जगदले विजय ने बताया कि 8 जुलाई की सुबह सदर थाना परिसर में ग्रेनेड विस्फोट हुआ था. घटना के तुरंत बाद भारतीय न्याय संहिता (BNS), एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण कानून के तहत मामला दर्ज किया गया.

इसके बाद मोगा पुलिस की 10 टीमें, तकनीकी विशेषज्ञ और खुफिया एजेंसियां जांच में जुट गईं. लगातार छापेमारी और पूछताछ के बाद पुलिस पूरे नेटवर्क तक पहुंचने में सफल रही.

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3 आरोपियों ने दिया था वारदात को अंजाम

पुलिस जांच में सामने आया कि फिरोजपुर के रहने वाले गगन उर्फ काली, राजेश और शुभम ने मिलकर इस हमले को अंजाम दिया था. पुलिस के मुताबिक गगन उर्फ काली ने थाना परिसर में ग्रेनेड फेंका, जबकि उसका एक साथी पूरी घटना का वीडियो बना रहा था और तीसरा आरोपी मोटरसाइकिल पर मौजूद था. तीनों को गिरफ्तार कर पूछताछ की गई तो कई अहम खुलासे हुए.

तीनों आरोपियों से पूछताछ के बाद पुलिस लाजर उर्फ अमन तक पहुंची. उसकी गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने उसके पास से आईईडी, विस्फोटक सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक डेटोनेटर और 9 एमएम ग्लॉक पिस्तौल बरामद की.

पूछताछ में पता चला कि उसकी सोशल मीडिया के जरिए विदेश में बैठे इकबाल उर्फ रबी धालीवाल से बातचीत होती थी. पुलिस के अनुसार आरोपियों को इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए पैसों का लालच देकर इस साजिश में शामिल किया गया था.

जम्मू-तवी एक्सप्रेस को निशाना बनाने की थी तैयारी

जांच में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि आरोपी जम्मू-तवी एक्सप्रेस को विस्फोट से उड़ाने की योजना बना रहे थे. पुलिस का कहना है कि समय रहते कार्रवाई कर इस साजिश को नाकाम कर दिया गया. अगर यह योजना सफल हो जाती तो बड़ा हादसा हो सकता था.

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बरामद हथियार और विस्फोटक सामग्री पाकिस्तान से भारत भेजी गई थी. पुलिस के मुताबिक यह सामान अमृतसर रूरल और जलालाबाद बॉर्डर के रास्ते डीएलबी (DLB) नेटवर्क के जरिए भारत पहुंचाया गया. पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क और विदेश में बैठे लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है.

पुलिस के अनुसार विदेश में बैठे इकबाल उर्फ रबी धालीवाल के संपर्कों की जांच जारी है. जांच में यह भी पता चला है कि उसके कुछ रिश्तेदार और उसकी सहयोगी कुलजीत कौर ने भी आरोपियों तक पैसे और हथियार पहुंचाने में मदद की थी. इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने के लिए जांच लगातार जारी है.

मजदूर और हलवाई को बनाया गया मोहरा

पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में लाजर उर्फ अमन हलवाई का काम करता था, जबकि गगन उर्फ काली, राजेश और शुभम मजदूरी करते थे. शुरुआती जांच के मुताबिक इन लोगों को पैसों का लालच देकर आतंकी गतिविधियों में शामिल किया गया.

पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों पर यूएपीए की धारा 16, 17, 18, 20, 38 और 40 के अलावा बीएनएस की धारा 109, 111 और 113 तथा एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट की धारा 4 और 5 भी जोड़ दी हैं. इसके साथ ही पाकिस्तान में बैठे शहजाद भट्टी द्वारा सोशल मीडिया पर KLA के नाम से इस हमले की जिम्मेदारी लेने के दावे की भी जांच की जा रही है.

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पुलिस का कहना है कि फिलहाल सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है. जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इस पूरे नेटवर्क से जुड़े और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है. फिलहाल मोगा पुलिस का दावा है कि उसने समय रहते एक बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम कर दिया है.