उत्तराखंड के पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत द्वारा सिख समाज के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने के बाद उत्तराखंड की राजधानी में सियासी तनाव बढ़ गया है. शनिवार (6 दिसंबर) को सिखों ने घंटाघर चौक, दून में विरोध प्रदर्शन कर पूर्व मंत्री का पुतला दहन किया. वहीं पंजाब में आम आदमी पार्टी ने भी कांग्रेस नेता पर हमला बोला है.
AAP विधायक का हमला
आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक ने भी इस बयान को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि यह जानबूझ कर दिया गया है.उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सोच सिखों से नफ़रत की रही है.AAP विधायक ने ऑपरेशन ब्लू स्टार, देश में सिख कत्लेआम और फिर कत्लेआम के आरोपों से घिरे नेताओं को बड़े पद देने का हवाला दिया.उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब साबित करता है कि कांग्रेस सिखों के खिलाफ ही रहेगी.
दरअसल, शुक्रवार (5 दिसंबर) को हरिद्वार रोड स्थित वकीलों के धरनास्थल पर समर्थन देने पहुंचे कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत ने आपत्तिजनकर बयान दिया. वकीलों की हड़ताल के 26वें दिन, जब वह समर्थन जता रहे थे, तभी एक सिख वकील कुछ कहने के लिए खड़े हुए. रावत ने उन्हें बैठने के लिए कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी.
विरोध और हंगामा
वकीलों ने तुरंत रावत के लहजे पर आपत्ति जताई और इसे सिख समुदाय का अपमान बताया. भारी विरोध और हंगामा होने के कारण हरक सिंह रावत को तुरंत माफी मांगकर धरनास्थल छोड़ना पड़ा.
बार कार्यालय में दी सफाई, मांगी क्षमा
शाम को हरक सिंह रावत ने जिला अदालत में बार एसोसिएशन के कार्यालय पहुँचकर इस पूरे मामले पर अपना पक्ष रखा. उन्होंने कहा किजिस सिख वकील को उन्होंने बैठने को कहा था, उनसे उनके निजी और घनिष्ठ संबंध हैं.उनकी टिप्पणी का उद्देश्य किसी का मज़ाक उड़ाना या भावना आहत करना नहीं था.उन्होंने सिखों की बहादुरी के इतिहास को ध्यान में रखकर वह बात कही थी, जिसका गलत मतलब निकाल लिया गया.
उन्होंने अंत में कहा कि फिर भी यदि किसी की भावना आहत हुई है, तो वह क्षमा मांगते हैं.रावत की सफाई के बावजूद सिख समाज में उनके बयान को लेकर गहरा आक्रोश बना हुआ है.
