Dushyant Chautala News: लोकसभा चुनाव से कुछ महीने पहले हरियाणा में एक बड़ा सियासी बदलाव देखने को मिला. एक झटके में साढ़े चार साल से चला रहा है बीजेपी-जेजेपी का गठबंधन टूट गया. उसी दिन दूसरा बड़ा झटका तब लगा, जब अचानक मनोहर लाल खट्टर ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और देखते ही देखते शाम तक प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री बना दिया गया. बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर जेजेपी-बीजेपी का गठबंधन क्यों टूटा. इसको लेकर पूर्व उपमुख्यमंत्री और जेजेपी नेता दुष्यंत चौटाला ने बड़ा खुलासा किया है.

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दुष्यंत चौटाला ने बीबीसी हिंदी से बात करते हुए कहा, "लोकसभा चुनावों को लेकर जब दोनों दलों में सहमति नहीं बनी तो दोनों ने अपने-अपने रास्ते अलग कर लिए. इसके बाद जेजेपी ने नई सरकार का हिस्सा बनने से भी इनकार कर दिया. क्यों,कि दोनों पार्टियों के बीच लोकसभा के निर्णय तय नहीं हो पा रहे थे. 5100 रुपये पेंशन का मुद्दा था वो फाइनल नहीं हो रहा था. मुझे लगता है कि राजनीति के अंदर निर्णय समय पर हो जाए तो बेहतर है. आज हमारी पार्टी भी 10 लोकसभा सीटों पर लड़ने की तैयारी कर रही है और उनकी पार्टी भी."

क्या एक सीट बनी गठबंधन टूटने की वजह?

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वहीं जब दुष्यंत चौटाला से पूछा गया कि क्या एक ही सीट आपके गठबंधन टूटने की वजह बनी? इस पर उन्होंने कहा कि हम दो सीटें मांग रहे थें, लेकिन वो दोनों में से एक सीट भी नहीं दे रहे थे. ये न होने पर हमारी तरफ से 5100 रुपये बुढ़ापा पेंशन के साथ-साथ आगामी विधानसभा की सीटों को फाइनल करने के लिए कहा गया. अगर वो ये भी फाइनल कर देते तो हम भी नहीं लड़ते.

बता दें कि फिलहाल अब जेजेपी हरियाणा की दस की दस सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटी है. हालांकि, अभी तक जेजेपी के तरफ से अपने लोकसभा उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की गई है. हरियाणा में छठे चरण में 25 मई को वोटिंग होगी.

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